लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’, नेताओं ने कहा-देश को करना पड़ा सालों तक इंतजार

नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम’ गूंजेगा। इस ऐतिहासिक फैसले पर नेताओं ने खुशी जताई और इसे देश की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान बताया।

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आईएएनएस से कहा, “देश को उस अमर गीत को सुनने के लिए इतने साल इंतजार करना पड़ा, जिसने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को बलिदान और देश के लिए समर्पण की प्रेरणा दी। मेरा मानना है कि उन सभी लोगों की आत्माएं और दिल निश्चित रूप से शांति और खुशी महसूस करेंगे जब राष्ट्र का वह अमर गीत लाल किले की प्राचीर से गूंजेगा।”

केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, “वंदे मातरम। प्रधानमंत्री ने देश की जनता से संकल्प लिया था कि हम सब मिलकर हर घर में तिरंगा फहराएंगे। यह एक बहुत बड़ा संदेश है।”

भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, “वंदे मातरम बहुत पहले से गूंजना चाहिए था। बंकिम चंद्र चटर्जी ने इसे एक विशेष भावना के साथ लिखा था, और स्वतंत्र भारत ने उसे उसी भावना से स्वीकार किया। कुछ लोगों ने वंदे मातरम् को बांटने की कोशिश की, लेकिन जब देश की जनता ने पीएम मोदी को नेतृत्व सौंपा, तो वह बांटने वाली भावना खत्म हो गई। वंदे मातरम को एक बार फिर पूरे रूप में प्रस्तुत किया जाने लगा है, और इस साल इसे लाल किले पर भी बजाया जाएगा।”

भाजपा सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा, “भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरम’ के नारे ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई। कई सालों तक इसकी उपेक्षा होना दुर्भाग्यपूर्ण था। आज हम सौभाग्यशाली हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘वंदे मातरम’ की गूंज एक बार फिर लाल किले से सुनाई देगी और पूरी दुनिया में सुनी जाएगी।”

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से ‘वंदे मातरम’ का पहली बार बजना देशभर में देशभक्ति की भावना को और मजबूत करेगा। नेताओं का मानना है कि यह गीत न सिर्फ स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी देशसेवा की प्रेरणा देगा।

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