एलपीजी की कीमतों में भारी गिरावट से ओएमसी की कमाई पर दबाव, पश्चिम एशिया संकट के बाद बढ़ी लागत ने घटाया मुनाफा

नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में मजबूत लाभप्रदता दर्ज करने के बाद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (क्यू1) में सरकारी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की आय और लाभप्रदता पर दबाव देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार के बावजूद एलपीजी (एलपीजी) पर होने वाली भारी अंडर-रिकवरी और मार्केटिंग घाटे ने कंपनियों की कमाई को प्रभावित किया।

केयरएज रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया कि देश की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में एलपीजी की बिक्री पर लगभग 13,700 करोड़ रुपए की संयुक्त अंडर-रिकवरी का सामना करना पड़ा, जिसमें सरकार की ओर से मिली 7,500 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति को समायोजित करने के बाद का आंकड़ा शामिल है। कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य से कम कीमत पर रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध करा रही थीं, जिसके कारण यह नुकसान हुआ।

केयरएज रेटिंग्स ने बताया कि कुल एलपीजी अंडर-रिकवरी 31 मार्च 2026 के 48,200 करोड़ रुपए से बढ़कर 30 जून 2026 तक 61,900 करोड़ रुपए हो गई। इस तेज वृद्धि की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण वैश्विक एलपीजी आपूर्ति शृंखला में आई अभूतपूर्व बाधाएं रहीं। इससे आयात लागत और खुदरा बिक्री मूल्य के बीच अंतर काफी बढ़ गया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय एलपीजी बेंचमार्क सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (सऊदी सीपी) में बड़ी उछाल देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका औसत स्तर 530 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, जो वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बढ़कर 785 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पहुंच गया। यानी इसमें लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि बाद के महीनों में आपूर्ति स्थिति में सुधार आने से कीमतों में कुछ नरमी आई। जुलाई 2026 में सऊदी सीपी घटकर 592 डॉलर प्रति मीट्रिक टन और अगस्त 2026 में 632 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर आ गया।

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है। पश्चिम एशिया से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद भारत ने अमेरिका और अन्य बाजारों से एलपीजी खरीद बढ़ाई। हालांकि वैकल्पिक स्रोतों से आयात करने के कारण कंपनियों की लैंडेड कॉस्ट (आयात लागत) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

बढ़ती खरीद लागत के प्रभाव को कम करने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी कीमतों में भी संशोधन किया। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के दौरान 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 89 रुपए की बढ़ोतरी की गई, ताकि अंडर-रिकवरी का कुछ बोझ कम किया जा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 से अंतरराष्ट्रीय एलपीजी कीमतों में गिरावट आने के कारण कंपनियों की खरीद लागत कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में एलपीजी अंडर-रिकवरी में लगभग 40 प्रतिशत की क्रमिक कमी आने की उम्मीद है।

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