नई दिल्ली, 19 अगस्त (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का अपना खास महत्व है। कोई शुभ काम करना हो, यात्रा पर निकलना हो, पूजा-पाठ की तैयारी हो या फिर किसी नए काम की शुरुआत करनी हो, पंचांग देखकर समय तय करने की परंपरा रही है। पंचांग सिर्फ तारीख और दिन की जानकारी नहीं देता, बल्कि तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, दिशाशूल और ग्रहों की स्थिति जैसी कई चीजों की जानकारी भी देता है।
20 अगस्त 2026 को सावन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है और गुरुवार का दिन है। अष्टमी तिथि रात 9:20 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। अष्टमी के दिन पूजा-पाठ, ध्यान, मंत्र जाप और अपनी श्रद्धा के अनुसार धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं।
इस दिन सूर्योदय सुबह 5:34 बजे होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 6:30 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय दोपहर 12:39 बजे और चंद्रास्त रात 11:15 बजे होगा। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। नक्षत्र की बात करें तो विशाखा नक्षत्र सुबह 9:09 बजे तक रहेगा। इसके बाद नक्षत्र परिवर्तन होगा। इस दिन इंद्र योग सुबह 4:26 बजे तक रहेगा, जबकि विष्टि करण सुबह 8:17 बजे तक रहेगा। इसके बाद पंचांग की गणना के अनुसार अगले योग और करण का प्रभाव रहेगा।
अगर शुभ समय की बात करें तो इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक रहेगा। किसी जरूरी शुभ कार्य के लिए इस समय को ध्यान में रखा जा सकता है। हालांकि किसी विशेष धार्मिक संस्कार या मांगलिक कार्य के लिए व्यक्तिगत कुंडली और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना ज्यादा उचित माना जाता है।
वहीं आज राहुकाल दोपहर 1:39 बजे से 3:16 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 8:48 से 10:25 बजे तक और यमघण्टकाल सुबह 5:34 से 7:11 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण काम शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज दिशाशूल दक्षिण दिशा में है। ऐसे में अगर दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो तो पंचांग मानने वाले लोग दिशाशूल का ध्यान रखते हैं।





