नई दिल्ली, 8 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रहे संघर्ष का असर ईरान के अंदर दिख रहा है। युद्ध के कारण बनी आर्थिक तंगी के चलते ईरान ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी की है।
इस बढ़ोतरी की मार ईंधन की अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ेगी। दिसंबर के बाद से यह दूसरी बार है जब ईरान ने पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की है।
बांग्लादेश की निजी समाचार एजेंसी ‘यूएनबी’ ने सरकारी मीडिया के हवाले से बताया कि ईरान ने मंगलवार सुबह पेट्रोल का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए नई और अधिक कीमत लागू कर दी। यह फैसला कई महीनों से चल रहे युद्ध के कारण बढ़े आर्थिक दबाव के बीच लिया गया है। देश की मुद्रा कमजोर होती जा रही है और देश इस समय महंगाई की मार झेल रहा है।
यह फैसला मंगलवार से प्रभावी हो गया है। अब निर्धारित सीमा से ज्यादा पेट्रोल खरीदने वालों को ज्यादा कीमत भी चुकानी होगी। इससे पहले भी कीमतों में बढ़ोतरी दिसंबर में की गई थी। अब यह दूसरी बार है जब पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने अपनी घोषणा में अमेरिका के साथ हुए युद्ध का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया, लेकिन उसने ‘मौजूदा परिस्थितियों’ का हवाला दिया।
समाचार एजेंसी ‘यूएनबी’ के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत लोगों के लिए मासिक सीमा 110 लीटर (करीब 29 गैलन) निर्धारित की गई है। अब इससे ज्यादा पेट्रोल खरीदने पर प्रति लीटर 100,000 रियाल (लगभग 7 सेंट) चुकाने होंगे।
अमेरिका के साथ जारी संघर्ष का असर ईरान के साथ अन्य देशों को भी उठाना पड़ रहा है। कई देश इस समय ऊर्जा संकट से परेशान हैं। बांग्लादेश में बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच अगस्त में गैस की सप्लाई सबसे निचले स्तर पर आ गई है।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ‘द डेली स्टार’ ने 2017 से 2026 तक के गैस-सप्लाई डेटा के विश्लेषण के आधार पर बताया है कि अगस्त महीने में औसत दैनिक गैस सप्लाई गिरकर 2,235 मिलियन क्यूबिक फीट प्रति दिन (एमएमसीएफडी) हो गई।





