सूरत, 11 सितंबर (आईएएनएस)। सूरत साइबर क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के एक 35 वर्षीय साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि उस पर एक साइबर फ्रॉड नेटवर्क की मदद करने का आरोप है। इस नेटवर्क ने एक व्यक्ति और उसकी पत्नी को पांच दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ करके उनके बैंक अकाउंट वेरीफाई करने के बहाने उनसे 13 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुंबई के मलाड वेस्ट में रहने वाले और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले इक्विपमेंट सप्लायर अफाक आलम अंसारी के तौर पर हुई है। पुलिस ने बताया कि टेक्निकल जांच के बाद उसका पता दिल्ली में चला।
पुलिस के मुताबिक, इस मामले में शामिल आरोपी ने शिकायतकर्ता से फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और दावा किया कि उसके नाम पर एक सिम कार्ड लिया गया है और उसकी जानकारी का इस्तेमाल करके केनरा बैंक में एक अकाउंट भी खोला गया है।
साइबर ठग ने बताया कि उस अकाउंट से बड़े पैमाने पर पैसों का लेन-देन हुआ है।
आरोप है कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र पुलिस के लोगो वाला एक फर्जी पहचान पत्र भेजा, साथ ही सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन, फाइनेंशियल एंड क्राइम ब्रांच (मुंबई डिपार्टमेंट), रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के फर्जी पत्र भी भेजे।
आरोप है कि साइबर ठगों ने शिकायतकर्ता से कहा कि उनके नाम पर मौजूद केनरा बैंक अकाउंट का इस्तेमाल नरेश गोयल से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में किया गया था और इस मामले में उनकी भी भूमिका सामने आई है।
आरोपियों ने यह भी धमकी दी कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है और अगर उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी को पांच दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया।
इसके बाद आरोपियों ने उनसे कहा कि उनके बैंक अकाउंट में मौजूद पैसे को वेरिफिकेशन के लिए ट्रांसफर करना होगा। उनकी बात मानकर शिकायतकर्ता ने अलग-अलग बैंक अकाउंट में कुल 13 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया था।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी आलम ने अपने नाम से एक फर्म बनाई थी, जिसमें दिल्ली का पता दिया गया था। इसी फर्म के नाम पर यस बैंक में एक करंट अकाउंट खुलवाया था। आरोप है कि उसने तीन लाख रुपये के कमीशन के बदले यह बैंक अकाउंट एक फरार आरोपी को सौंप दिया था। जांचकर्ताओं को पता चला कि आलम के करंट बैंक अकाउंट से 6 दिसंबर, 2025 और 21 जनवरी, 2026 के बीच कुल 1,05,37,721 रुपये का लेन-देन हुआ था।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीसीआरपी) की जांच में इस अकाउंट से जुड़े अलग-अलग राज्यों से तीन शिकायतें भी मिलीं, जिनमें 2,43,03,521 रुपये की धोखाधड़ी का आरोप था।
पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे वीडियो या ऑडियो कॉल के जरिए पुलिस या सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाले लोगों के साथ अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
पुलिस ने कहा कि अधिकारी लोगों को स्काइप या अन्य वीडियो-कॉन्फ़्रेंसिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहकर डिजिटल रूप से गिरफ्तार या पूछताछ नहीं करते हैं, और न ही वे जुर्माने के तौर पर पैसे की मांग करते हैं।
पुलिस ने लोगों को यह सलाह भी दी कि वे पुलिस अधिकारी या अन्य अधिकारी बनकर बात करने वाले लोगों द्वारा बताए गए अकाउंट में पैसे ट्रांसफर न करें, भले ही वे ऑनलाइन गिरफ़्तारी वारंट या अन्य दस्तावेज दिखाएं।





