‘मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेना हमारे लिए बेइज्जती होती’, ऋचा घोष के पिता ने किया भारतीय टीम के फैसले का समर्थन

नई दिल्ली, 14 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय टीम ने रविवार को फाइनल में श्रीलंका को हराकर विमेंस एशिया कप 2026 का खिताब अपने नाम किया। हालांकि, पुरुष टीम की तरह भारतीय महिला टीम ने भी एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। भारतीय टीम के इस फैसले का ऋचा घोष के पिता मानबेंद्र घोष ने भी समर्थन किया है।

मानबेंद्र घोष ने ‘आईएएनएस’ के साथ बातचीत करते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई ट्रॉफी का बहिष्कार कर रहा है। ट्रॉफी तो हमेशा हमारी ही है।ऐसी फोर्स से जुड़े होने के कारण बदनाम हुए व्यक्ति से ट्रॉफी लेना, जिन्होंने हमें कई तरह से नुकसान पहुंचाया है, जिनमें से एक पहलगाम की घटना भी है। ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि इससे हमारे जख्म भर सकते हैं। ऐसे इंसान से ट्रॉफी लेना हमारे लिए बेइज्जती होती। मुझे लगता है कि भारतीय टीम का फैसला एकदम सही था।”

भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज के पिता ने टीम के प्रदर्शन की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा, “फाइनल जीतना ही सबसे बड़ी बात होती है जिसकी हम उम्मीद कर सकते हैं। इसी वजह से जब लड़कियों ने फाइनल जीता, तो हम बहुत खुश और उत्साहित थे। नहीं, यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है। उनमें से ज्यादातर, बल्कि सभी ने अच्छा खेला। जिस खिलाड़ी को भी मौका मिला, उसने कोशिश की और अपनी भूमिका निभाई। हम बस यही तो चाहते हैं।”

श्रीलंका के खिलाफ फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम का प्रदर्शन दमदार रहा। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 183 रन स्कोबोर्ड पर लगाए। टीम की ओर से शेफाली वर्मा ने 39 गेंदों में 68 रनों की दमदार पारी खेली, जबकि स्मृति मंधाना ने 59 रनों का योगदान दिया। बल्लेबाजों के बाद दीप्ति शर्मा और श्री चरणी की स्पिन जोड़ी ने मिलकर श्रीलंका की पूरी टीम को सिर्फ 111 रनों पर ऑलआउट किया। दीप्ति ने 3 और चरणी ने 4 विकेट चटकाए। भारतीय टीम ने रिकॉर्ड 8वीं बार एशिया कप के खिताब पर कब्जा जमाया।

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