नई दिल्ली, 16 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। कोई शुभ काम शुरू करना हो, पूजा-पाठ करना हो, यात्रा पर जाना हो या किसी महत्वपूर्ण काम के लिए समय तय करना हो, उससे पहले पंचांग देखने की परंपरा है। पंचांग दरअसल हिंदू काल-गणना की एक पद्धति है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसी गणनाओं के साथ सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को देखा जाता है।
17 सितंबर 2026, गुरुवार को शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि रहेगी। यह तिथि सुबह 10:49 बजे तक रहेगी, इसके बाद सप्तमी तिथि शुरू होगी। इस दिन भाद्रपद मास रहेगा। इस दिन सूर्योदय सुबह 5:45 बजे और सूर्यास्त शाम 6:01 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 11:24 बजे, जबकि चंद्रास्त रात 9:54 बजे होगा। दिन का नक्षत्र अनुराधा रहेगा, जो शाम 7:55 बजे तक है। इसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। वहीं विष्कुम्भ योग दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। करण की बात करें तो तैतिल करण सुबह 10:49 बजे तक रहेगा। इसके बाद अन्य करण की गणना होगी।
17 सितंबर को शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:29 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। इसे दिन के प्रमुख शुभ समयों में गिना जाता है। वहीं इस दिन राहुकाल दोपहर 1:25 बजे से 2:57 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 8:49 बजे से 10:21 बजे तक और यमघण्ट काल सुबह 5:45 बजे से 7:17 बजे तक रहेगा।
17 सितंबर को दिशाशूल दक्षिण दिशा में रहेगा। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, यदि इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करनी हो तो यात्रा से पहले दिशाशूल का ध्यान रखा जाता है।
इस दिन सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। पंचांग के अनुसार, सुबह 07:58 बजे सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे।





