करम पर्व पर राष्ट्रपति मुर्मु, सीएम हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

करम पर्व पर राष्ट्रपति मुर्मु, सीएम हेमंत सोरेन समेत कई नेताओं ने दी शुभकामनाएं

रांची/नई दिल्ली, 22 सितंबर  झारखंड के सबसे बड़े लोक पर्वों में से एक करम पूजा के मौके पर राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं ने शुभकामनाएं दी हैं। करम पर्व को अच्छी फसल, प्रकृति की आराधना और भाई-बहन के अटूट रिश्ते के लिए मनाया जाता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा,

“सभी देशवासियों को ‘करम पूजा’ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, कर्म के प्रति निष्ठा और भाईचारे की भावना से जुड़ा करम पर्व हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति एवं जीवन-मूल्यों की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह पर्व हमें प्रकृति का संरक्षण करने और सद्भाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है। मेरी कामना है कि ‘करम पूजा’ का यह पर्व सभी देशवासियों के जीवन में सुख और समृद्धि का संचार करे।”

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ‘एक्स’ पर लिखा,

“प्रकृति महापर्व करम पर्व की सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं और जोहार। प्रकृति और मानव जीवन के गहरे जुड़ाव, भाई-बहन के अटूट प्रेम, सामाजिक एकजुटता तथा हमारी समृद्ध संस्कृति और परंपरा का प्रतीक करम पर्व झारखंड की पहचान और हमारी जीवन-पद्धति से गहराई से जुड़ा हुआ है।”

उन्होंने लिखा

करम पर्व हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण की प्रेरणा देता है। हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि जल, जंगल और जमीन केवल हमारे जीवन के आधार नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर भी हैं।

मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा।

यह पर्व भाई-बहन के पवित्र स्नेह और आपसी विश्वास का भी पर्व है। अखड़ा में करम डाली की स्थापना, मांदर की थाप, करम गीत और सामूहिक नृत्य हमारी जीवंत लोक-संस्कृति की सुंदर अभिव्यक्ति हैं। आधुनिकता की राह पर आगे बढ़ते हुए भी हमें अपनी भाषा, संस्कृति और प्रकृति के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहिए।

सीएम सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा,

“प्रकृति महापर्व करम की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं और जोहार। करम पर्व हमारी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ हमारे गहरे रिश्ते का प्रतीक है। भाई-बहन के अटूट प्रेम से लेकर समाज की एकजुटता तक, यह पर्व हमें अपनी माटी और अपनी जड़ों से जोड़ता है।”

उन्होंने लिखा 

अखड़ा में करम डाली की पूजा, मांदर की थाप और सामूहिक नृत्य पुरखों से मिली अनमोल विरासत की पहचान हैं। यह पर्व जल, जंगल और जमीन का सम्मान करने का संदेश देता है।

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने लिखा,

“प्रकृति पर्व ‘करमा पूजा’ के पावन अवसर पर समस्त झारखण्डवासियों को शुभकामनाएं। करमा पूजा प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक एकजुटता का पर्व है। यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि एवं खुशहाली लेकर आए, यही मंगलकामना है।”

वहीं, केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट के जरिए बताया,

करम पर्व पवित्र करम पेड़ से लेकर पारंपरिक गीतों और नृत्य की लय तक प्रकृति, भक्ति और समुदाय के उत्सव को एक साथ लाता है। करम देवता को शक्ति, युवावस्था और जीवन शक्ति से जोड़ा जाता है। यह त्योहार भादो महीने के 11वें दिन मनाया जाता है और फसल से जुड़ा है। यह पेड़ की पूजा, संगीत और नृत्य की जीवंत परंपरा है, जिसकी जड़ें झारखंड में हैं।

Share this post:

खबरें और भी हैं...

लाइव टीवी

लाइव क्रिकट स्कोर

Weather Data Source: Wetter Indien 7 tage

Quick Link