सीमा के हालात तय करेंगे भारत-चीन रिश्ते कितने सामान्य होंगे: जयशंकर
न्यूयॉर्क, 29 सितंबर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कहा कि चीन के साथ भारत के संबंध सीमा पर तनाव के सबसे बुरे दौर से उबरकर बेहतर हुए हैं। हालांकि, दोनों देशों के रिश्ते कितने सामान्य हो पाएंगे, यह आगे भी सीमा पर हालात पर निर्भर करेगा।
जयशंकर ने कहा
कि भारत-चीन संबंध 2025 के मुकाबले अब बेहतर हैं और 2024 की तुलना में इनमें और ज्यादा सुधार आया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस सुधार को दोनों देशों के रिश्तों में किसी बुनियादी बदलाव के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा
कि 2020 की घटनाओं और उसके बाद लंबे समय तक चले सीमा विवाद की वजह से दोनों देशों के बीच सामान्य संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ था। व्यापार जारी रहा, लेकिन सरकारी स्तर पर बातचीत और अधिकारियों की आवाजाही, वीजा और उड़ानों पर असर पड़ा। जैसे-जैसे सीमा पर तनाव कम हुआ, इनमें से कुछ संपर्क फिर से शुरू होने लगे।
जयशंकर ने कहा
कि इसे रिश्तों के स्थिर होने का स्वाभाविक नतीजा माना जाना चाहिए, न कि इस बात का सबूत कि दोनों देशों के बीच मौजूदा समस्याएं खत्म हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत कई वर्षों से यह बात कहता आया है कि रिश्तों में लंबे समय तक तनाव बने रहना दोनों देशों के हित में नहीं है।
जयशंकर ने कहा,
“हमारे रिश्तों में गिरावट वास्तव में हम दोनों में से किसी के लिए फायदेमंद नहीं है।” उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति का फायदा तीसरे पक्ष उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सोच यह है कि ऐसे विवाद में लंबे समय तक फंसे रहने से बचना चाहिए, जिसका फायदा किसी और को हो। जयशंकर के मुताबिक, चीनी पक्ष को भी इस सोच को स्वीकार करने में कुछ समय लगा।
जयशंकर ने कहा
कि चीन के साथ रिश्तों में सुधार होने से भारत की स्थिति न सिर्फ चीन के साथ बातचीत में बल्कि दुनिया के दूसरे देशों के साथ उसके रिश्तों में भी मजबूत होती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि भारत अपने हितों के हिसाब से व्यावहारिक समाधान तलाशेगा।
उन्होंने कहा,
“अगर मुझे ऐसा समाधान मिल सकता है जो मेरे लिए काम करता हो, तो मैं वही करना पसंद करूंगा।”
जयशंकर ने एक बार फिर सीमा को दोनों देशों के रिश्तों के लिए सबसे अहम मुद्दा बताया।
उन्होंने कहा,
“सीमा की स्थिति ही रिश्तों की स्थिति तय करती है। ऐसा नहीं हो सकता कि सीमा पर तनाव हो, या उससे भी खराब हालात हों, और साथ ही आप कहें कि रिश्ते सामान्य रहने चाहिए।”
जयशंकर ने कहा
कि जैसे-जैसे सीमा पर हालात सामान्य होंगे, वैसे-वैसे दोनों देशों के बाकी रिश्ते भी सामान्य हो सकते हैं।
उन्होंने कहा
कि ज्यादा सामान्य रिश्ते भारत और चीन दोनों के लिए फायदेमंद होंगे। हालांकि, उनकी बातों से यह संकेत नहीं मिला कि दोनों देशों के बीच सभी मतभेद सुलझ गए हैं।
जयशंकर से भारत और चीन के बीच बढ़ती उड़ानों और सरकारी स्तर पर संपर्क को लेकर सवाल पूछा गया था।
उन्होंने पहले बंद हुए संपर्कों के दोबारा शुरू होने और दोनों देशों के रिश्तों में किसी बड़े और गहरे बदलाव के बीच फर्क बताया। उनका कहना था कि सीमा पर तनाव कम होने के बाद बंद पड़े संपर्क फिर शुरू हो सकते हैं। लेकिन रिश्तों में लंबे समय तक टिकने वाले बड़े बदलाव के लिए ज्यादा मजबूत आधार की जरूरत होगी। जयशंकर की टिप्पणी भारत की विदेश नीति को लेकर उनकी व्यापक सोच का भी हिस्सा थी।
उन्होंने कहा
कि देश अब कई बड़े साझेदारों के साथ अपने रिश्तों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही वे किसी एक देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहने के खतरे को भी कम करना चाहते हैं। भारत के लिए इसका मतलब है कि उसे चीन के साथ अपने रिश्तों को अमेरिका, यूरोप, जापान, रूस और दूसरे देशों के साथ संबंधों के साथ संतुलित करके देखना होगा।
भारत और चीन के बीच एक लंबी सीमा है,
जिसके कई हिस्सों को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है। 2020 में गलवान घाटी में हुई जानलेवा झड़प के बाद दोनों देशों के बीच सीमा तनाव ने दुनिया का ध्यान खींचा और आपसी रिश्तों पर भी इसका गहरा असर पड़ा।
राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार जारी रहा है।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि चीन के साथ संबंध पूरी तरह सामान्य होने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है।





