जलियांवाला बाग नरसंहार के स्मृति दिवस पर ओम बिरला समेत कई नेताओं ने किया शहीदों के बलिदान को नमन

नई दिल्ली। जलियांवाला बाग नरसंहार के स्मृति दिवस पर पूरा देश अमर शहीदों को नमन कर रहा है। ओम बिरला समेत कई प्रमुख नेताओं ने भी बलदानियों को श्रद्धांजलि दी है। नेताओं ने इस घटना को देश के इतिहास का अत्यंत पीड़ादायक अध्याय बताते हुए कहा कि शहीदों का बलिदान आज भी राष्ट्रसेवा, एकता और स्वतंत्रता के मूल्यों के प्रति प्रेरित करता है।

ओम बिरला का संदेश: शहीदों के बलिदान को कोटि-कोटि नमन

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “13 अप्रैल 1919 के दिन जलियांवाला बाग में देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन। निहत्थे, निर्दोष नागरिकों पर औपनिवेशिक शासन की निर्मम गोलियां भारत की आत्मा को झकझोर देने वाली घटना थी, जिसने पूरे राष्ट्र को एकजुट कर स्वतंत्रता के लिए निर्णायक संघर्ष की प्रेरणा दी।”

उन्होंने आगे लिखा, “जलियांवाला बाग की शहादत ने आजादी की लौ को और प्रज्वलित किया, गुलामी की बेड़ियों को तोड़ने का संकल्प और भी मजबूत किया और करोड़ों भारतीयों के मन में स्वाभिमान व स्वतंत्रता की भावना जागृत की। उन महान आत्माओं को श्रद्धापूर्वक नमन।”

योगी आदित्यनाथ ने बताया ‘पावन तीर्थ’, दी श्रद्धांजलि

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जलियांवाला बाग के अमर बलिदानियों को नमन करते हुए कहा, “जलियांवाला बाग वह पावन तीर्थ है, जहां असंख्य राष्ट्रभक्तों ने ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता के सामने अदम्य साहस और अद्वितीय त्याग का परिचय देते हुए मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। इन अमर क्रांतिवीरों का बलिदान हम सभी को सदैव राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता रहेगा।”

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “स्वतंत्रता की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले जलियांवाला बाग नरसंहार के अमर बलिदानियों को कोटि-कोटि नमन। यह अटूट राष्ट्रप्रेम प्रत्येक नागरिक को देश की सेवा और एकता के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है। कृतज्ञ राष्ट्र आपकी वीरता का सदैव ऋणी रहेगा।”

पुष्कर सिंह धामी ने बताया इतिहास का सबसे पीड़ादायक अध्याय

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी जलियांवाला बाग के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा, “13 अप्रैल 1919 का वह हृदय विदारक दिवस, जब निहत्थे और निर्दोष भारतीयों पर हुए निर्मम अत्याचार ने पूरे देश की चेतना को झकझोर दिया, आज भी हमारे इतिहास का सबसे पीड़ादायक अध्याय है। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले उन वीरों का साहस, त्याग और अटूट देशभक्ति सदैव हमें राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की प्रेरणा देती रहेगी।”

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव का संदेश

मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने लिखा, “जलियांवाला बाग नरसंहार के स्मृति दिवस पर मां भारती की स्वाधीनता में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। आपकी अमर गाथा सदैव हमें राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पित करने और स्वतंत्रता की इस अनमोल धरोहर की रक्षा करने के लिए प्रेरणा देती रहेगी।”

जलियांवाला बाग नरसंहार: आज भी देता है देशभक्ति की प्रेरणा

13 अप्रैल 1919 की यह घटना भारतीय इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था और स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। आज भी यह दिन शहीदों के अद्वितीय साहस और बलिदान की याद दिलाता है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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