रोम, 17 अप्रैल — रिपोर्ट में चौंकाने वाला दावा
चीन में कोविड-19 से मौतों की संख्या 65 वर्ष से ऊपर के लोगों में 14.4 से 25.6 लाख अतिरिक्त मौतों के बीच होने का अनुमान लगाया गया है। यह आंकड़े स्वतंत्र अध्ययनों से मेल खाते हैं और आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक बताए गए हैं।
‘जीरो कोविड’ नीति को बताया गया सख्त और व्यापक
इटली की ऑनलाइन मैगज़ीन Bitter Winter की रिपोर्ट में कहा गया कि तीन साल तक चीन एक बड़े स्वास्थ्य संकट से जूझता रहा, जो ‘जीरो कोविड’ नीति के तहत पैदा हुआ। इसमें बड़े पैमाने पर टेस्टिंग, डिजिटल निगरानी, पूरे इलाकों को क्वारंटीन करना और सख्त लॉकडाउन शामिल थे।
दुनिया से अलग रहा चीन का कोविड मॉडल
रिपोर्ट के अनुसार, जब दुनिया के कई देशों में संक्रमण की लहरें आईं, तब चीन ने सख्त प्रतिबंधों के जरिए वायरस को काफी हद तक नियंत्रित रखा। हालात ऐसे थे कि मामूली लक्षण पर भी पूरे इलाके को सील कर दिया जाता था।
ओमिक्रॉन वैरिएंट से नीति हुई कमजोर
2022 के अंत तक COVID-19 का ओमिक्रॉन वैरिएंट इन पाबंदियों को दरकिनार करते हुए तेजी से फैलने लगा, जिससे ‘जीरो कोविड’ रणनीति कमजोर पड़ गई।
कड़े लॉकडाउन के खिलाफ भड़का जनआक्रोश
रिपोर्ट में कहा गया कि महीनों तक चली सख्त पाबंदियों के कारण लोगों में असंतोष बढ़ा और चीन में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जो तियानआनमेन स्क्वायर विरोध 1989 के बाद सबसे बड़े बताए गए।
सरकार ने अचानक खत्म की ‘जीरो कोविड’ नीति
कुछ ही दिनों में सरकार ने 7 दिसंबर 2022 को ‘जीरो कोविड’ नीति समाप्त कर दी। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसे अपनी जीत के रूप में प्रस्तुत किया।
नीति खत्म होते ही बढ़ा संक्रमण और स्वास्थ्य संकट
रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिबंध हटते ही संक्रमण तेजी से बढ़ा, जिससे स्वास्थ्य तंत्र पर भारी दबाव पड़ा। अस्पताल भर गए, दवाइयों की कमी हो गई और एंटीवायरल दवाएं तेजी से खत्म हो गईं।
मृत्यु दर में अचानक भारी उछाल
रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2022 के आखिरी सप्ताह में कुछ समूहों में मौतें सामान्य से 10 गुना तक बढ़ गईं। एक हफ्ते में मृत्यु दर 1030 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो अगले सप्ताह 680 प्रतिशत रही।
कुल मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज
रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में कुल मौतों में 19 प्रतिशत और 2023 में 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस संकट के बड़े प्रभाव को दर्शाता है।
अचानक फैसले को बताया गया असली समस्या
रिपोर्ट में कहा गया कि असली समस्या लॉकडाउन खत्म करना नहीं था, बल्कि इसे अचानक लागू करना था। यह मान लिया गया कि तीन साल से नियंत्रित वायरस सिस्टम के तैयार होने तक इंतजार करेगा।
‘जीत’ के दावों के पीछे छिपी त्रासदी
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने इसे जीत के रूप में पेश किया, लेकिन वास्तविक स्थिति लोगों के शोक संदेशों और बढ़ती मौतों में नजर आई।





