गर्मियों में क्यों बढ़ता है गुस्सा? जानिए पित्त संतुलन के असरदार उपाय और ठंडक पाने के तरीके

Meta Description: गर्मियों में चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ जाता है? जानिए आयुर्वेद के आसान उपाय, पित्त संतुलन के तरीके और मन को शांत रखने के असरदार टिप्स।

नई दिल्ली, 22 अप्रैल। गर्मियों के आते ही मन और तन का संतुलन बना पाना मुश्किल हो जाता है क्योंकि बाहर के वातावरण के साथ शरीर के भीतर का तापमान भी अनियंत्रित हो जाता है।

गर्मियों में क्यों बढ़ता है गुस्सा और चिड़चिड़ापन

गर्मी की वजह से पित्त बढ़ता है और पित्त बढ़ने की वजह से गुस्सा व चिड़चिड़ापन पूरे दिन रहता है। छोटी-छोटी बातों पर क्रोध, चिड़चिड़ापन, अधीरता, सिर में गर्मी, बेचैनी और भीतर की अशांति कई बार बढ़े हुए पित्त का संकेत हो सकते हैं। ऐसे में गर्मियों में पित्त को संतुलित रखना बहुत जरूरी है।

आयुर्वेद क्या कहता है मन और शरीर को शांत रखने के लिए

आयुर्वेद का मानना है कि अगर शरीर को शीतलता और आराम मिले तो मन और तन दोनों शांत हो सकते हैं। गर्मियों में विश्राम करने से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और मन भी अच्छा रहता है। हमेशा ज्येष्ठ माह में दिन में सोने और भरपूर आराम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन इसी के साथ अगर आप शरीर को अंदर से शीतल रखते हैं तो पित्त खुद-ब-खुद संतुलित रहता है।

हर्बल टी से करें शरीर को ठंडा और तनाव कम

गर्मियों में चाय पीना कम करना चाहिए क्योंकि यह शरीर को गर्मी और अधिक बढ़ा देती है। इससे शरीर में जलन और गर्मी दोनों पैदा होती है। इसके बदले हर्बल टी का सहारा लें। हर्बल टी में तुलसी, गुलाब की पत्तियां, पैशनफ्लावर और कैमोमाइल को मिलाकर दिन में दो बार पीएं। यह हॉर्मोन को संतुलित करती है और तनाव को कम करने में मदद करती है।

घी नस्य और चंदन लेपन से पाएं ठंडक और शांति

घी नस्य की प्रक्रिया भी शरीर के पित्त को संतुलित करने में मदद करती है। इससे शरीर का रुखापन कम होता है और मस्तिष्क और मन दोनों को शांति मिलती है। इसके लिए रात के समय घी की बूंदें नाक में डालें। इससे तनाव कम होता है और तंत्रिका-तंत्र भी शांत होता है।

पित्त और क्रोध को शांत करने के लिए चंदन का लेपन बहुत प्रभावी उपाय है। चंदन की तासीर ठंडी होती है और उसे माथे पर लगाने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और मन अशांत नहीं रहता।

तेल मालिश से कम करें गर्मी और बेचैनी

इसके साथ ही, भृंगराज या नारियल तेल से मालिश भी कर सकते हैं। अगर लोगों को गर्मियों में गुस्सा और बैचेनी दोनों होने लगती है, तो ऐसे में तलवों और सिर की मालिश करना बेहद फायदेमंद होता है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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