राजस्थान हाई कोर्ट से आसाराम को राहत, मेडिकल कारणों से 25 मई तक बढ़ी जमानत

जोधपुर/अहमदाबाद, 29 अप्रैल । राजस्थान हाई कोर्ट ने बुधवार को रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की अंतरिम जमानत को चिकित्सा कारणों से 25 मई तक बढ़ा दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने आसाराम की जमानत अवधि बढ़ाने के लिए दायर एक आवेदन पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया, जिसकी अवधि मई की शुरुआत में समाप्त होने वाली थी।

अदालत ने निर्देश दिया कि अंतरिम राहत 25 मई तक या उच्च न्यायालय द्वारा उनकी लंबित आपराधिक अपील पर फैसला सुनाए जाने तक, जो भी पहले हो, जारी रहेगी। आसाराम की ओर से पेश हुए अधिवक्ता यशपाल राजपुरोहित ने बताया कि हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अपील पर सुनवाई पूरी कर ली है और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाई कोर्ट ने अपील पर सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। आसाराम का इलाज अभी जारी है, इसलिए इलाज पूरा होने तक जमानत की अवधि बढ़ाई जानी चाहिए।”

राज्य सरकार ने इस याचिका का विरोध किया और अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी ने अंतरिम जमानत की अवधि को और आगे बढ़ाने के खिलाफ तर्क दिया। 84 वर्षीय आसाराम को एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराए जाने के बाद से 2018 से आजीवन कारावास की सजा काटनी पड़ रही है। उन्हें सर्वप्रथम जनवरी 2025 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अंतरिम चिकित्सा जमानत दी गई थी, और बाद में अक्टूबर 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट से छह महीने की जमानत मिली थी, जिसकी अवधि समाप्त होने वाली थी।

यह तजा आदेश गुजरात में उनके आश्रम से जुड़ी जमीन को लेकर चल रही समानांतर कानूनी कार्यवाही के बीच आया है। इस सप्ताह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने अहमदाबाद के मोटेरा क्षेत्र में आश्रम को आवंटित भूमि के खिलाफ गुजरात सरकार द्वारा शुरू की गई तत्काल बेदखली और जब्ती की कार्रवाई पर रोक लगा दी, और मामले की आगे की जांच होने तक संपत्ति को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।

 

भूमि विवाद की जड़ें इस आरोप में निहित हैं कि आश्रम ने अपने मूल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया और अनधिकृत निर्माण किया। इससे पहले के फैसलों में राज्य द्वारा नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास नियोजित खेल अवसंरचना सहित सार्वजनिक विकास के लिए भूमि के कुछ हिस्सों को पुनः प्राप्त करने के कदम को बरकरार रखा गया था, जिसमें अधिकारियों ने आवंटन की शर्तों के उल्लंघन और अनुमत सीमा से परे अतिक्रमण का हवा

ला दिया था।

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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