हाईटेक डिजाइन और विश्वस्तरीय निर्माण का उदाहरण है गंगा एक्सप्रेसवे

29 अप्रैल । मेरठ से प्रयागराज तक फैला गंगा एक्सप्रेसवे केवल एक हाईवे नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का नया सुपर कॉरिडोर बनकर उभरा है। लगभग 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के साथ प्रदेश को ‘एक्सप्रेसवे स्टेट’ के रूप में स्थापित कर रहा है।

 

120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाला यह प्रोजेक्ट यात्रा को तेज, सुरक्षित और सुगम बनाते हुए विकास की नई इबारत लिख रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे को आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। 6 लेन के इस एक्सप्रेसवे पर 14 दीर्घ सेतु, 165 लघु सेतु, 7 आरओबी, 32 फ्लाईओवर, 453 अंडरपास और 795 बॉक्स कलवर्ट बनाए गए हैं।

 

प्रमुख मार्गों से बेहतर कनेक्टिविटी के लिए 21 स्थानों पर इंटरचेंज विकसित किए गए हैं, जिससे आवागमन पूरी तरह निर्बाध रहेगा। प्रोजेक्ट की एक खासियत यह भी है कि इसे भविष्य की जरूरतों के मुताबिक डिजाइन किया गया है। आने वाले सालों में ट्रैफिक लोड बढ़ने की स्थिति में इसे आसानी से 6 से 8 लेन में परिवर्तित किया जा सकेगा। यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे पर हर एक किलोमीटर पर सोलर ऊर्जा से संचालित हाईटेक स्मार्ट कैमरे लगाए गए हैं।

 

इसके साथ ही 9 आधुनिक जन-सुविधा परिसरों में फूड कोर्ट, फ्यूल स्टेशन और विश्राम की व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 737 किमी लंबी सर्विस रोड स्थानीय लोगों के आवागमन को आसान बनाती है।

 

गंगा एक्सप्रेसवे की एक विशेषता इसकी आपातकालीन एयरस्ट्रिप है, जिसे भारतीय वायुसेना के फाइटर प्लेन की लैंडिंग और टेकऑफ के लिए तैयार किया गया है। इससे यह एक्सप्रेसवे केवल यातायात ही नहीं, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाता है। इस सुविधा के साथ उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे पर एयरस्ट्रिप के मामले में देश में अग्रणी बन गया है।

 

यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित 12 जिलों को जोड़ता है। इससे न केवल यात्रा समय में कमी आएगी, बल्कि इन जिलों के बीच व्यापार, उद्योग और संसाधनों का प्रवाह भी तेज होगा। गंगा एक्सप्रेसवे के शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में अग्रणी बन रहा है। यह परियोजना राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन ग्रोथ मॉडल को मजबूत करती है और ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम साबि

त हो रही है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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