आदित्य ठाकरे का बंगाल चुनावों पर तीखा हमला, लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर उठाए सवाल

मुंबई, 29 अप्रैल । शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े किए। ठाकरे ने लोगों से अपील की कि वे एक पल रुककर निष्पक्ष और गैर-राजनीतिक ढंग से सोचें कि बंगाल में जो कुछ हो रहा है, क्या वह सही है।

शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि बंगाल का गौरव इस समय चुनाव जीतने की लालच भरी ताकत के सामने चुनौती बनकर खड़ा है। उनका आरोप है कि राज्य के नागरिकों को परेशान किया गया और लाखों लोगों को उनके मताधिकार से वंचित किया गया। ठाकरे ने कहा कि यह सब उस देश में हो रहा है, जो कभी खुद को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहने पर गर्व करता था।

चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए उन्होंने इसे पक्षपातपूर्ण करार दिया। ठाकरे के मुताबिक, बंगालियों को डराने-धमकाने की कोशिश की गई और उन्हें दबाव में रखकर एक विशेष राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर मतदाताओं के बीच भय का माहौल बनाया गया।

 

उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में लाखों की संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई, जिन्हें उन क्षेत्रों से हटाया गया जहां उनकी वास्तविक जरूरत थी, जैसे देश की सुरक्षा और अशांत इलाकों में शांति बनाए रखना। ठाकरे ने सवाल उठाया कि आखिर बंगाल के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है, मानो वह किसी बाहरी हमले का सामना कर रहा हो।

 

संघीय ढांचे की बात करते हुए उन्होंने ‘सहकारी संघवाद’ के महत्व पर जोर दिया। ठाकरे ने कहा कि भारत में राज्यों और केंद्र के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, लेकिन मौजूदा हालात में इस सिद्धांत का उल्लंघन होता दिख रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव जीतने के लिए इस तरह की रणनीति पहले कभी नहीं अपनाई गई और इसे लोकतंत्र नहीं कहा जा सकता।

 

अपने बयान में उन्होंने यह भी दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया के संचालन से यह संकेत मिलता है कि भारतीय लोकतंत्र कमजोर हो रहा है। उनके मुताबिक, यह डर और नफरत के सहारे किसी राज्य पर कब्जा करने का एक संस्थागत प्रयास प्रतीत होता है, जिसमें विभिन्न संस्थाओं, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों का दुरुपयोग किया जा रहा है।

 

अंत में ठाकरे ने उम्मीद जताआदित्य ठाकरे का बंगाल चुनावों पर तीखा हमला, लोकतंत्र और संघीय ढांचे पर उठाए सवई कि बंगाल की जनता इस कथित लालच और खतरे का करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक व्यक्ति या नेता का मुद्दा नहीं है, बल्कि बंगाल के सम्मान, उसके गौरव और भारत के लोकतांत्रिक आदर्शों से जुड़ा हुआ मामला है। साथ ही, उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और साख से भी जोड़ा, जो दुनिया के सामने एक लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत होती है।

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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