पृथ्वी के अस्तित्व के लिए जरूरी है सूर्य, जानें सूरज की रोशनी से कैसे बनती है बिजली? कैसे काम करता है ‘सोलर पावर’

नई दिल्ली, 3 मई । पृथ्वी पर जीवन का सबसे बड़ा स्रोत है सूर्य। अनाज से लेकर जलवायु, मौसम नियंत्रण तक में इसकी भागीदारी है। पूरी मानव जाति एक साल में जितनी ऊर्जा इस्तेमाल करती है, उतनी ऊर्जा सूर्य सिर्फ एक घंटे में पृथ्वी को दे देता है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जब दुनिया ऊर्जा संकट और प्रदूषण से जूझ रही है, तब सूर्य की रोशनी से बिजली बनाने वाली सौर ऊर्जा सबसे सस्ता, साफ और अनलिमिटेड विकल्प बनकर उभरी है। 3 मई को हर साल अंतरराष्ट्रीय सूर्य दिवस मनाया जा रहा है, जो सौर ऊर्जा के महत्व को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।

सौर ऊर्जा को बिजली में बदलने की प्रक्रिया को ‘सोलर पावर’ कहते हैं। यह तकनीक लगभग 200 साल पुरानी है, लेकिन आज यह घरों से लेकर अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी है। सोलर पावर न सिर्फ बिजली पैदा करती है बल्कि पर्यावरण को भी बचाती है क्योंकि इसमें कोई धुआं, प्रदूषण या आवाज नहीं होती। सिर्फ सूरज की रोशनी काफी है।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, सोलर पावर का मतलब है सूरज की रोशनी को बिजली में बदलना। यह प्रक्रिया ‘फोटोवोल्टिक इफेक्ट’ पर आधारित है। सन 1839 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक अलेक्जेंडर एडमंड बेकरेल (उस समय सिर्फ 19 साल के थे) ने सबसे पहले इस प्रभाव की खोज की। वे अपने पिता की लैब में प्रयोग कर रहे थे। जब उन्होंने रोशनी पर काम किया तो बिजली का करंट पैदा हुआ। यही घटना सोलर पावर की नींव बनी।

वैज्ञानिक बताते हैं कि सोलर पैनल मुख्य रूप से सिलिकॉन नामक सामग्री से बनाए जाते हैं। सिलिकॉन एक सेमीकंडक्टर है, यानी यह बिजली को आसानी से कंट्रोल कर सकता है। एक सामान्य सोलर सेल में सिलिकॉन की तीन पतली परतें होती हैं। बीच वाली परत प्योर सिलिकॉन की होती है। ऊपरी और निचली परतों में थोड़े अलग तत्व मिलाए जाते हैं जैसे एक तरफ फास्फोरस और दूसरी तरफ बोरॉन। जब सूरज की रोशनी इन परतों पर पड़ती है तो सिलिकॉन के अंदर मौजूद इलेक्ट्रॉन उत्तेजित हो जाते हैं और घूमने लगते हैं। ये इलेक्ट्रॉन एक परत से दूसरी परत की ओर खिंचते हैं। इससे एक तरफ नेगेटिव चार्ज और दूसरी तरफ पॉजिटिव चार्ज जमा होता है। दोनों तरफ तार लगाकर सर्किट बनाया जाता है। इलेक्ट्रॉन इस सर्किट से बहते हुए बिजली पैदा करते हैं जो हम इस्तेमाल कर सकते हैं।

खास बात है कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई धुआं, प्रदूषण या आवाज नहीं होती। सिर्फ सूरज की रोशनी चाहिए होती है और बीजली पैदा हो जाती है। सोलर पैनल इतने उपयोगी हैं कि स्पेस एजेंसी इन्हें अंतरिक्ष यानों में भी इस्तेमाल करते हैं। नासा के अनुसार, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप भी सोलर पैनल से ही बिजली प्राप्त करता है।

नासा लगातार सोलर टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने का काम कर रहा है। अंतरिक्ष में सोलर पावर की शुरुआत की बात करें तो सोलर सेल का पहला सफल इस्तेमाल 1958 में हुआ था। अमेरिका ने मार्च 1958 में वैंगार्ड-1 नाम का पहला सोलर पावर से चलने वाला सैटेलाइट लॉन्च किया। इससे पहले स्पुतनिक और एक्सप्लोरर-1 जैसे सैटेलाइट सिर्फ बैटरी पर चलते थे और कुछ हफ्तों में बंद हो जाते थे, लेकिन वैंगार्ड-1 ने छह साल तक डाटा भेजा। आज सोलर पावर घरेलू बिजली, स्ट्रीट लाइट, पानी के पंप और बड़े-बड़े सोलर पार्क में इस्तेमाल हो रहा है।

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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