मेक इन इंडिया’ को बड़ा बढ़ावा, दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को कैबिनेट ने दी मंजूरी

नई दिल्ली, 5 मई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। यह फैसला देश में चिप मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

ये दोनों प्रोजेक्ट गुजरात में लगाए जाएंगे, जिनमें कुल मिलाकर करीब 3,936 करोड़ रुपए का निवेश होगा। इन प्रोजेक्ट्स से लगभग 2,230 कुशल लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

 

इनमें से एक प्रोजेक्ट देश की पहली कमर्शियल मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले फैसिलिटी होगी, जो गैलियम नाइट्राइड (जीएएन) तकनीक पर आधारित होगी। इसके अलावा एक सेमीकंडक्टर पैकेजिंग यूनिट भी स्थापित की जाएगी।

 

पहला बड़ा प्रोजेक्ट क्रिस्टल मैट्रिक्स लिमिटेड द्वारा गुजरात के धोलेरा में विकसित किया जाएगा। यह प्लांट कंपाउंड सेमीकंडक्टर निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) पर काम करेगा, जिसमें खास फोकस मिनी/माइक्रो-एलईडी डिस्प्ले मॉड्यूल बनाने पर रहेगा।

 

यह यूनिट जीएएन फाउंड्री सेवाएं भी देगी और हर साल 72,000 वर्ग मीटर डिस्प्ले पैनल और 24,000 आरजीबी वेफर्स का उत्पादन करेगी। इनका उपयोग टीवी, स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल डिस्प्ले, स्मार्टवॉच और एक्सआर (एक्सटेंडेड रियलिटी) जैसे नए टेक्नोलॉजी डिवाइस में होगा।

 

दूसरा प्रोजेक्ट सुची सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सूरत में लगाया जाएगा। यह एक आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) यूनिट होगी, जिसमें हर साल 1,033 मिलियन से ज्यादा चिप्स का उत्पादन किया जाएगा।

 

ये चिप्स पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, एनालॉग सर्किट्स और इंडस्ट्रियल सिस्टम्स में इस्तेमाल होंगे, जिससे ऑटोमोबाइल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर को फायदा मिलेगा।

 

इन दो नए प्रोजेक्ट्स के साथ भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कुल प्रोजेक्ट्स की संख्या 12 हो गई है और कुल निवेश करीब 1.64 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

 

सरकार का मानना है कि इससे भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता मजबूत होगी और चिप डिजाइन के क्षेत्र में देश की बढ़ती ताकत को और सपोर्ट मिलेगा।

 

सरकार ने यह भी बताया कि देश में सेमीकंडक्टर सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 315 शैक्षणिक संस्थानों और 104 स्टार्टअप्स को डिजाइन इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट दिया जा रहा है।

 

पहले से मंजूर कई प्रोजेक्ट्स पर काम तेजी से चल रहा है, जिनमें से दो यूनिट्स ने उत्पादन शुरू कर दिया है और दो अन्य जल्द ही काम शुरू करने वाली हैं।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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