स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से वैश्विक व्यापार पर असर, हजारों जहाज फंसे

वॉशिंगटन, 5 मई । अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ गया है, जिसकी वजह से हजारों कमर्शियल जहाज फंस गए हैं। इससे दुनिया भर का व्यापार प्रभावित हो रहा है और ऊर्जा सप्लाई पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसका असर भारत जैसे उन देशों पर भी पड़ सकता है जो ज्‍यादातर सामान और तेल आयात पर निर्भर हैं।

 

 

अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि 1,550 से ज्यादा कमर्शियल जहाजों पर सवार लगभग 22,500 नाविक इस समय इस इलाके से आगे नहीं जा पा रहे हैं, क्योंकि ईरान की तरफ से हमलों और समुद्री जहाजों को लेकर धमकियों का खतरा बना हुआ है।

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच एक बहुत ही संकरा लेकिन बेहद अहम समुद्री रास्ता है। यहां से दुनिया के लगभग 20 प्रत‍िशत तेल की खपत गुजरती है, इसलिए इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है।

 

इस स्थिति की वजह से तेल टैंकरों और कार्गो जहाजों की भारी कतार लग गई है। इससे तेल की सप्लाई में देरी और पूरी सप्लाई चेन पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां भी अब जोखिम को दोबारा आंक रही हैं, जिससे माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है।

 

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह नागरिक जहाजों को परेशान कर रहा है। हर देश के नाविकों को धमका रहा है और एक अहम समुद्री रास्ते को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय दबाव या वसूली जैसा तरीका बताया।

 

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ शुरू किया है, जिसका मकसद समुद्री व्यापार को फिर से सामान्य बनाना है। इसके तहत अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के संसाधन जहाजों को इस रास्ते से सुरक्षित निकलने में मदद कर रहे हैं।

 

दो अमेरिकी झंडे वाले कमर्शियल जहाज पहले ही अमेरिकी डेस्ट्रॉयर जहाजों की सुरक्षा में इस रास्ते से गुजर चुके हैं। इससे यह दिखाया गया है कि रास्ता खुला है और अब दुनिया भर के सैकड़ों जहाज आगे बढ़ने की तैयारी में हैं।

 

जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन एयर फ़ोर्स जनरल डैन केन ने कहा कि पिछले सात हफ्तों में ईरान ने बार-बार कमर्शियल शिपिंग को धमकाया और हमला किया है, ताकि समुद्री व्यापार को लगभग रोककर वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया जा सके।

 

उन्होंने बताया कि ईरान ने सीजफायर के बाद भी नौ बार कमर्शियल जहाजों पर हमला किया है। दो कंटेनर जहाजों को जब्त किया है और अमेरिकी बलों पर दस से ज्यादा हमले किए हैं। हालांकि ये हमले अभी बड़े युद्ध की सीमा तक नहीं पहुंचे हैं।

 

अमेरिका ने इस इलाके में 15,000 से ज्यादा सैनिक, युद्धपोत, हेलिकॉप्टर और 100 से अधिक विमान तैनात किए हैं, ताकि एक सुरक्षित समुद्री गलियारा बनाया जा सके और जहाजों की सुरक्षा की जा सके।

 

हेगसेथ ने कहा कि सीजफायर खत्म नहीं हुआ है और इस मिशन को उन्होंने रक्षात्मक कदम बताया, जिसका मकसद सिर्फ समुद्री रास्ते को सुरक्षित रखना है।

 

भारत जो खाड़ी देशों से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करता है। अगर यह रुकावट लंबे समय तक चलती है तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। आयात खर्च बढ़ेगा और महंगाई का दबाव भी महसूस हो सकता है।

 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय से एक बड़ा भू-राजनीतिक तनाव वाला क्षेत्र रहा है, लेकिन मौजूदा संकट हाल के हफ्तों में बढ़े तनाव और एक कमजोर सीजफायर के बाद सामने आया है जो अभी भी लागू है।

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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