भोपाल रेल मंडल में चेन पुलिंग करने पर 440 लोगों पर कार्रवाई

भोपाल, 5 मई । मध्य प्रदेश के भोपाल रेल मंडल में रेल यातायात को निर्बाध गति से जारी रखने के लिए रेल प्रशासन की ओर से कदम उठाए गए हैं। चेन पुलिंग करने वाले 440 लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है।

 

रेल प्रशासन की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि रेल सुरक्षा और संचालन में व्यवधान को रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने ट्रेनों में अलार्म चेन पुलिंग की घटनाओं को रोकने के लिए कई कठोर कदम उठाए हैं। अलार्म चेन का गलत उपयोग न केवल ट्रेन संचालन में देरी का कारण बनता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है।

 

रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत ट्रेनों में बिना उचित और पर्याप्‍त कारण के चेन पुलिंग किया जाना अपराध है। ऐसा करते पाए जाने पर एक वर्ष तक कारावास या एक हजार रुपए तक के जुर्माने या दोनों से दंडित किया जा सकता है।

 

भोपाल मंडल द्वारा इस वित्तीय वर्ष के प्रथम माह अप्रैल, 2026 में रेलवे अधिनियम की धारा 141 के तहत कुल 440 मामले दर्ज कर न्‍यायालय के माध्‍यम से 62,150 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया। भोपाल मंडल सभी रेल उपयोगकर्ताओं के लिए बेहतर यात्री सुविधाओं को उपलब्ध कराने के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है।

 

इन्हीं प्रयासों के क्रम में, मंडल के वाणिज्य विभाग एवं रेलवे सुरक्षा बल द्वारा बिना उचित कारण के अलार्म चेन खींचने वालों के विरुद्ध निरंतर सघन चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। रेल प्रशासन ने यात्रियों से कहा कि बिना उचित एवं पर्याप्त कारण के चेन पुलिंग न करें। ऐसा करना दंडनीय अपराध है। ऐसा करने से ट्रेन की समय पालनता प्रभावित होती है, अन्य यात्रियों को परेशानी होती है, और रेलवे को आर्थिक नुकसान होता है।

 

सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि यात्रियों को सुरक्षित यात्रा अनुभव मिले और अलार्म चेन-पुलिंग जैसी घटनाओं को कड़े कदमों से रोका जा सके।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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