केंद्र सरकार ने गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य बढ़ाकर 365 रुपए प्रति क्विंटल किया

नई दिल्ली, 5 मई । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने गन्ना किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए, चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य 365 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। यह मूल्य पुनर्प्राप्ति न्यूनतम 10 दशमलव दो-पांच प्रतिशत दर पर आधारित है, जिसमें शून्य दशमलव एक प्रतिशत की प्रत्येक वृद्धि पर 3.56 रुपए प्रति क्विंटल का प्रीमियम और पुनर्प्राप्ति में शून्य दशमलव एक प्रतिशत की प्रत्येक कमी पर 3.56 रुपए प्रति क्विंटल की कमी का प्रावधान है।

 

 

सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए यह भी फैसला किया है कि जिन चीनी मिलों में चीनी पुनर्प्राप्ति दर 9 दशमलव 5 प्रतिशत से कम है, वहां कोई कटौती नहीं की जाएगी। चीनी पुनर्प्राप्ति दर गन्ने के कुल वजन के अनुपात में उससे प्राप्त चीनी की मात्रा को प्रतिशत में दर्शाता है। ऐसे किसानों को आगामी चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 में गन्ने के लिए 338.3 रुपए प्रति क्विंटल मिलेंगे।

 

चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत (वास्तविक नकद खर्च + पारिवारिक श्रम मूल्य) 182 रुपए प्रति क्विंटल है। 10 दशमलव दो-पांच प्रतिशत की पुनर्प्राप्ति दर पर यह उचित और लाभकारी मूल्य 365 रुपए प्रति क्विंटल है, जो उत्पादन लागत से 100 दशमलव 5 प्रतिशत अधिक है। चीनी उत्पादन सीजन 2026-27 के लिए उचित और लाभकारी मूल्य 2025-26 की तुलना में 2 दशमलव आठ-एक प्रतिशत अधिक है।

 

स्वीकृत किए गए उचित और लाभकारी मूल्य चीनी मिलों द्वारा चीनी के उत्पादन सीजन 2026-27 (पहली अक्टूबर, 2026 से आरंभ) में किसानों से गन्ने की खरीद पर लागू होगा। चीनी उत्पादन क्षेत्र एक महत्वपूर्ण कृषि आधारित क्षेत्र है जो लगभग 5 करोड़ गन्ना किसानों और उनके आश्रितों तथा चीनी मिलों में प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत लगभग 5 लाख श्रमिकों की आजीविका प्रदान करता है। इसके अलावा कृषि श्रम और परिवहन सहित विभिन्न सहायक गतिविधियों में लोग काम करते हैं।

 

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर और राज्य सरकारों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श के बाद उचित और लाभकारी मूल्य का निर्धारण किया गया है।

 

पिछले चीनी उत्पादन सीजन 2024-25 में, देय 1,02,687 करोड़ रुपए के गन्ना मूल्य बकाए में से लगभग 1,02,209 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को 20.04.2026 तक किया जा चुका है; इसी अनुरूप लगभग 99 दशमलव 5 प्रतिशत गन्ने की बकाया राशि का भुगतान हो चुका है। मौजूदा चीनी उत्पादन सीजन 2025-26 में, देय 1,12,740 करोड़ रुपए के गन्ना बकाए में से किसानों को 20.04.2026 तक लगभग 99,961 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है; तदनुसार गन्ने की बकाया राशि का लगभग 88 दशमलव 6 प्रतिशत का भुगतान हो चुका है।

 

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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