गुजरात में एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान तेज, पांच लाख से अधिक किशोरियों को लगी वैक्सीन

गांधीनगर, 7 मई । गुजरात में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे राज्यव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) वैक्सीनेशन अभियान के तहत अब तक पांच लाख से अधिक किशोरियों को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है।

 

 

राज्य सरकार के अनुसार, 6 मई तक 5,62,324 पात्र किशोरियों में से कुल 5,14,566 को वैक्सीन दी जा चुकी है, जिसमें पहले से टीकाकरण करा चुकी लड़कियां भी शामिल हैं। इस तरह अभियान की कुल कवरेज 91.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। केवल बुधवार को ही राज्यभर में 7,913 किशोरियों का टीकाकरण किया गया।

 

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में यह अभियान पूरे गुजरात में संचालित किया जा रहा है और अब तक किसी भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव का मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यह वैक्सीन की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

 

यह अभियान 14 वर्ष की किशोरियों को लक्षित करते हुए चलाया जा रहा है। राज्यभर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों, जिला और उप-जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (यूपीएचसी) में यह वैक्सीन मुफ्त में लगाई जा रही है।

 

जिलावार आंकड़ों में कई क्षेत्रों ने 100 प्रतिशत से अधिक कवरेज दर्ज किया है। राजकोट कॉरपोरेशन में 10,622 पात्र किशोरियों के मुकाबले कुल 11,565 टीकाकरण किए गए, जो 109 प्रतिशत कवरेज है। भावनगर कॉरपोरेशन में 4,859 पात्र किशोरियों के मुकाबले 5,014 टीकाकरण हुए, जो 103 प्रतिशत कवरेज दर्शाता है।

 

नर्मदा जिले में 5,962 पात्र किशोरियों के मुकाबले 6,139, जूनागढ़ कॉरपोरेशन में 2,293 के मुकाबले 2,330, जामनगर कॉरपोरेशन में 4,753 के मुकाबले 4,847 तथा गांधीनगर कॉरपोरेशन में 3,162 के मुकाबले 3,207 किशोरियों का टीकाकरण किया गया। इन सभी क्षेत्रों में कवरेज 101 से 103 प्रतिशत के बीच रहा।

 

गिर सोमनाथ और अरावली जिलों में भी 101 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई। महिसागर और सुरेंद्रनगर जिलों ने 100 प्रतिशत कवरेज हासिल की, जबकि गांधीनगर जिले में 100.1 प्रतिशत टीकाकरण दर्ज किया गया।

 

उच्च प्रदर्शन वाले जिलों में जूनागढ़ और अहमदाबाद जिले ने 99 प्रतिशत कवरेज दर्ज की। बनासकांठा और वडोदरा कॉरपोरेशन में 93 प्रतिशत, सूरत कॉरपोरेशन में 92 प्रतिशत, वलसाड और पंचमहल में 94 प्रतिशत तथा दाहोद, आनंद और वडोदरा जिले में 95 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई।

 

भरूच, महेसाणा, तापी और सूरत जिले में 96 प्रतिशत टीकाकरण हुआ। छोटा उदयपुर, खेड़ा, पोरबंदर और पाटन में 97 प्रतिशत, जबकि बोटाद और साबरकांठा में 98 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई।

 

वहीं कुछ जिलों में कवरेज अपेक्षाकृत कम रही। मोरबी और अमरेली में 91 प्रतिशत, देवभूमि द्वारका और कच्छ में 90 प्रतिशत तथा राजकोट जिले में 88 प्रतिशत कवरेज दर्ज की गई। डांग जिले में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत रहा।

 

सबसे कम कवरेज अहमदाबाद कॉरपोरेशन में दर्ज की गई, जहां 48,443 पात्र किशोरियों में से केवल 22,813 का टीकाकरण हुआ, जो 47 प्रतिशत है।

 

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि यह अभियान मई के अंत तक जारी रहेगा और पात्र परिवारों से अपील की गई है कि जिन 14 वर्षीय लड़कियों का अभी तक टीकाकरण नहीं हुआ है, वे नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर वैक्सीन अवश्य लगवाएं।

 

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने अभिभावकों से अपील की कि वे बिना देरी के बच्चियों का टीकाकरण पूरा कराएं और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं से बचें। उन्होंने कहा कि इस तरह के दावे वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों को अभियान में भाग लेने से नहीं रोकना चाहिए।

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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