एनडीए के नेताओं ने कहा, ‘बिहार में डबल इंजन की सरकार में तेज गति से होगा विकास’

पटना, 7 मई । पटना स्थित गांधी मैदान में गुरुवार को सम्राट चौधरी सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। निशांत कुमार, विजय कुमार सिन्हा, श्रवण कुमार और लेसी सिंह समेत कुल 32 लोगों ने मंत्रीपद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व सीएम नीतीश कुमार समेत कई दिग्गज नेता शामिल हुए।

 

 

बिहार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि नए मंत्रिमंडल को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। अगले पांच साल बिहार के लिए एक स्वर्णिम काल साबित होंगे।

 

दिलीप जायसवाल ने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने एक बार फिर मुझे मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है। सम्राट चौधरी के नेतृत्व और नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में तथा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से बिहार सरकार की प्राथमिकता एक विकसित बिहार के सपने को साकार करना है।

 

लेसी सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार ने मुझ पर भरोसा जताया है, और इसके लिए मैं अपने नेता के प्रति आभार और धन्यवाद व्यक्त करती हूं।

 

संजय कुमार सिंह ने कहा कि मैं अपने नेता चिराग पासवान और बिहार के मुख्यमंत्री के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

 

रमा निषाद ने कहा कि बिहार की समस्त जनता को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बार फिर हम पर भरोसा जताया है और हमें सेवा करने का अवसर प्रदान किया है।

 

राम कृपाल यादव ने कहा कि मैं अपनी पार्टी के नेतृत्व, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेतृत्व, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त करना चाहूंगा, जिन्होंने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

 

राम चंद्र प्रसाद ने कहा कि जब कोई जिम्मेदारी दी जाती है, तो उसे पूरा करना ही होता है। इसे पूरी ईमानदारी के साथ निभाना होता है। पहले, केवल एक विधानसभा क्षेत्र के लोग ही काम देख रहे थे, अब पूरे बिहार के लोग काम देखेंगे।

 

राज भूषण चौधरी ने कहा कि बिहार के लिए यह बहुत ही खुशी का दिन है। हम सभी कार्यकर्ताओं के लिए भी बहुत खुशी का दिन है कि प्रधानमंत्री स्वयं आए और नवगठित मंत्रिमंडल को अपना आशीर्वाद दिया।

 

संतोष सुमन ने कहा कि निश्चित रूप से, यह एक बड़ी जिम्मेदारी और भरोसे की बात है, और मैं इस भरोसे पर खरा उतरने की हर संभव कोशिश करूंगा।

 

भगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि सरकार ने जिम्मेदारी दी है, और सम्राट चौधरी तथा नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में उस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाएंगे।

 

नीतीश मिश्रा ने कहा कि हम अपने नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने मुझे मंत्रिपरिषद में काम करने का एक और अवसर दिया।

 

श्रवण कुमार ने कहा कि 2005 से पहले की चुनौतियों और आज की चुनौतियों में अंतर है। पिछले 21 वर्षों में नीतीश कुमार ने उन सभी चुनौतियों का सामना किया है और बिहार को आगे बढ़ाया है।

 

निशांत कुमार को मंत्री बनाए जाने पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि निशांत कुमार ने आगे कदम बढ़ाया है, और यह जदयू के लिए सौभाग्य की बात है।

 

 

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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