सर्पदंश में गलत घरेलू उपाय जानलेवा, एक्सपर्ट से जानें क्या करें, क्या नहीं

नई दिल्ली, 8 मई । बेमौसम बरसात या ग्रामीण इलाकों में सांप का निकलना आम बात है। वहीं, कई बार सर्पदंश या सांप काटने की स्थिति नजर आती है, जो जानलेवा भी हो सकती है। एक्सपर्ट बताते हैं कि सर्पदंश वास्तव मेंं एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। घबराहट में या गलत घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करने से स्थिति और बिगड़ सकती है। सही जानकारी और तुरंत सही कदम उठाने से सर्पदंश के मरीज की जान बचाई जा सकती है।

नेशनल हेल्थ मिशन का कहना है कि सर्पदंश के मामले में समय सबसे महत्वपूर्ण है। देश में हर साल बड़ी संख्या में लोग सांप के काटने का शिकार होते हैं। कई बार लोग डर के मारे या झाड़-फूंक पर भरोसा करते हुए कीमती समय गंवा बैठते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। सही समय पर उपचार मिलने से ज्यादातर मामलों में मरीज को बचाया जा सकता है।

साप काटने पर घाव को साफ पानी से धोएं। मरीज से अंगूठी, कड़ा, जूता या कोई भी टाइट कपड़ा तुरंत हटा दें। मरीज को शांत रखें और ज्यादा हिलने-डुलने से बचाएं। बिना किसी देरी के नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें।

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि सांप काटने पर घाव पर चीरा न लगाएं। घाव पर कसकर पट्टी या बंधन न बांधें। जहर चूसने की कोशिश कभी न करें। झाड़-फूंक, देशी नुस्खे या किसी भी तरह के घरेलू उपाय पर समय बर्बाद न करें।

सर्पदंश के बाद सबसे बड़ा खतरा घबराहट और गलत इलाज से होता है। जहर शरीर में तेजी से फैल सकता है, इसलिए मरीज को जितना हो सके कम हिलाएं। घाव को चीरा लगाने या जहर चूसने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और स्थिति और खराब हो सकती है।

ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की सलाह है कि सांप काटने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल जाएं जहां एंटी-वेनम सीरम और जरूरी इलाज उपलब्ध होता है। निजी क्लिनिक या घरेलू उपचार पर भरोसा करने की बजाय सरकारी अस्पताल जाना ज्यादा सुरक्षित है।

सांपों वाले इलाकों में सतर्क रहें। रात के समय चलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और लंबी घास या अंधेरी जगहों से बचें। अगर सांप दिख जाए तो उसे छेड़ें नहीं, दूर हट जाएं। सर्पदंश एक मेडिकल इमरजेंसी है। घबराहट की बजाय शांत रहकर सही कदम उठाएं तो जान बचना तय है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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