तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने राहुल गांधी से की मुलाकात, मीनाक्षी नटराजन मामले पर चर्चा

नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए कहा कि राहुल गांधी से मिलना हमेशा ऊर्जा और प्रेरणा देने वाला अनुभव होता है। रेवंत रेड्डी ने लिखा, “अपने नेता राहुल गांधी से मिलना हमेशा प्रेरणादायक रहता है। मैंने उनके साथ तेलंगाना के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उनकी दूरदर्शी सलाह और मार्गदर्शन हम सभी के लिए आगे की दिशा तय करने में मददगार साबित होंगे।” यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब कांग्रेस नेता और तेलंगाना मामलों की प्रभारी मीनाक्षी नटराजन का मध्य प्रदेश से राज्यसभा नामांकन खारिज होने का मामला पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल पैदा कर चुका है। दरअसल, रिटर्निंग अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उन्होंने अपने हलफनामे में तेलंगाना हाईकोर्ट में लंबित एक मामले का उल्लेख नहीं किया था। इस घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश भाजपा नेताओं ने दावा किया कि उन्हें इस मामले से जुड़े दस्तावेज तेलंगाना कांग्रेस के ही एक नेता के माध्यम से मिले थे। इस विवाद को कांग्रेस आलाकमान ने गंभीरता से लेते हुए कथित आंतरिक साजिश (इंटरनल सबोटाज) की जांच के लिए एक समिति गठित की है। साथ ही अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) को भी आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए हैं कि आखिर पार्टी के भीतर से दस्तावेज कैसे लीक हुए। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है, क्योंकि मीनाक्षी नटराजन राज्यसभा चुनाव के लिए उनकी पसंद मानी जा रही थीं। इसी बीच एआईसीसी ने मीनाक्षी नटराजन को पंजाब के लिए पार्टी पर्यवेक्षकों (ऑब्जर्वर) में भी शामिल किया है। मीनाक्षी नटराजन हैदराबाद की एक महिला कांग्रेस नेता द्वारा दर्ज उत्पीड़न (हैरासमेंट) मामले में सात प्रतिवादियों में शामिल हैं। पिछले वर्ष चौथे अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी (एसीएमएम) अदालत ने उन्हें नोटिस जारी कर निजी शिकायत पर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। अदालत का यह नोटिस, जो राज्य कांग्रेस मुख्यालय गांधी भवन में तामील हुआ था, उनके राज्यसभा नामांकन खारिज होने के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वहीं, शिकायत दर्ज कराने वाली पूर्व महिला पार्षद ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर दुख जताया और दावा किया कि 6 जून को कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता का निजी सहायक अदालत पहुंचकर इस मामले से जुड़े दस्तावेज लेकर गया था। हालांकि उन्होंने संबंधित नेता का नाम बताने से इनकार किया, लेकिन कहा कि अदालत परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच कर इसकी पुष्टि की जा सकती है। महिला ने अपनी शिकायत में कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी के खिलाफ कार्रवाई न करने को लेकर मीनाक्षी नटराजन समेत सात कांग्रेस नेताओं को प्रतिवादी बनाया था। इस मामले में नटराजन और अन्य नेताओं ने अदालत में जवाबी हलफनामे दाखिल किए हैं। नटराजन ने अपने हलफनामे में कहा था कि उन्हें दुर्भावनापूर्ण मंशा के तहत मामले में पक्षकार बनाया गया है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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