‘आईवीएफ में गड़बड़ी की वजह से हमारा पूरा परिवार सदमे में है’, गुरुग्राम के दंपति ने सुनाई आपबीती

नई दिल्ली। गुरुग्राम के दंपति ने आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) इलाज के दौरान ‘एम्ब्रियो की अदला-बदली’ की वजह से हुई गड़बड़ी और उससे जुड़ी अपनी दर्दनाक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे क्लिनिक और डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को निराशा और डिप्रेशन में धकेल दिया है। राहुल राठौर ने आईएएनएस से ​​बात करते हुए कहा कि वे अधिकारियों और मेडिकल बोर्ड के उदासीन और असंवेदनशील रवैये से भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं। मेडिकल बोर्ड इस मामले की जांच कर सकता था और उनकी परेशानी का कोई ‘समाधान’ निकाल सकता था, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। गुरुग्राम के रहने वाले राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर पिछले तीन महीनों से अपने ‘असली बच्चों’ के बारे में जानकारी पाने और इस पूरी गड़बड़ी की गहन जांच की मांग को लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। राहुल राठौर ने आईएएनएस को बताया, “हमारे बुजुर्ग माता-पिता बहुत तकलीफ में हैं। मेरे पिता इतने सदमे में हैं कि वे बिल्कुल चुप हो गए हैं, और मेरी 80 वर्षीय मां मानसिक सदमे में हैं। मेरी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्य इस सदमे से उबरने के लिए बहुत संघर्ष कर रहे हैं।” यह दंपति पिछले तीन महीनों से संबंधित अधिकारियों और पुलिस से संपर्क कर रहा है, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कोर्ट के आदेश के बाद ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। दंपति ने कहा कि वे भावनात्मक और मानसिक रूप से टूट चुके हैं, और अगर उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला, तो उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने बताया कि उनकी परेशानी पिछले साल शुरू हुई, जब वे इलाज के लिए एक नामी आईवीएफ अस्पताल गए थे। उन्होंने सीमेन कलेक्शन, एग रिट्रीवल और एम्ब्रियो डेवलपमेंट की पूरी प्रक्रिया का पालन किया। 14 मई, 2025 को महिला के गर्भ में एम्ब्रियो इम्प्लांट किए गए और इस साल जनवरी में उसने जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। हालांकि, असली परेशानी तब शुरू हुई जब उन्हें बच्चों के शारीरिक लक्षणों में काफी अंतर दिखाई दिया। दंपति ने बच्चों की डीएनए प्रोफाइलिंग करवाई और कथित तौर पर नतीजे मेल नहीं खाए, जिससे यह साबित हुआ कि जुड़वां बच्चे उनके जैविक बच्चे नहीं थे। राहुल राठौर ने कहा, “मैटरनिटी और पैटरनिटी, दोनों टेस्ट नेगेटिव आए। इस वजह से उनकी पत्नी की याददाश्त जाने लगी है।” उन्होंने कहा, “हमें अभी तक यह नहीं पता चला है कि एम्ब्रियो (भ्रूण) किस स्टेज पर बदले गए थे।” यह कपल मामले की जांच की मांग कर रहा है। वे एम्ब्रियो और लैब रिकॉर्ड की जांच के साथ-साथ आईवीएफ क्लिनिक के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच करवाना चाहते हैं।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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