टीएमसी छोड़ना कोई धोखा नहीं, संविधान देता है इसकी इजाजत: सुदीप बंद्योपाध्याय

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में 15 साल की सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में बगावत की लहर तेज हो गई है। पार्टी की लोकसभा सदस्यों में से 20 सांसदों ने अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय कर लिया है। दावा किया जा रहा कि बागी गुटों के सांसदों की संख्या में इजाफा हो सकता है। इसी बीच, टीएमसी के बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने साफ कहा कि उन्होंने टीएमसी को कोई धोखा नहीं दिया है। उन्होंने दावा किया कि दो-तिहाई सांसदों के अलग होने की स्थिति का संविधान में भी जिक्र है। मीडिया से बातचीत के दौरान सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि हम 20 लोकसभा सांसद हैं। अगर सांसद अलग हो रहे हैं, तो यह धोखा नहीं कहा जाएगा। देश का संविधान इसकी इजाजत देता है। लोकसभा भी इसकी इजाजत देती है। अगर संख्या दो-तिहाई से कम होती, तो यह धोखा माना जाता। दरअसल अगर किसी राजनीतिक दल के लोकसभा में मौजूद कम से कम दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होकर किसी दूसरे दल में शामिल होने या विलय का फैसला करते हैं, तो उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य नहीं ठहराया जाता। बागी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि मैंने कांग्रेस छोड़कर टीएमसी जॉइन की थी। मैंने छोड़ने से पहले कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया था। उसके बाद ही मैं टीएमसी में शामिल हुआ। ‘असली टीएमसी’ के सवाल पर उन्होंने कहा कि कौन असली है, इसका फैसला कोर्ट करेगा। सांसद ने महाराष्ट्र के शिवसेना विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि अदालत ने तय किया था कि असली शिवसेना कौन है। कोर्ट के फैसले के बाद असली शिवसेना कौन थी, सभी को पता चला। सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि लोकसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है। सत्र शुरू होने से पहले अगले कदम उठाए जाएंगे। टीएमसी सांसद ने कहा कि मेरे लिए नियमित रूप से दिल्ली आना-जाना संभव नहीं है। इस बात पर चर्चा हो रही है कि दोनों पक्ष कैसे साथ बैठेंगे, करीब आएंगे और समूह के लिए भविष्य की कार्ययोजना तय करेंगे। टीएमसी के प्रतीक, संपत्ति और अन्य संगठनात्मक मामलों पर सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि इन सभी मुद्दों पर निर्णय लेने होंगे। अनुभव बताता है कि इनमें से कई मामले अंततः अदालत में सुलझाए जाएंगे। लोकसभा स्पीकर की जिम्मेदारी में संसदीय गुट को मान्यता देना, उसका गठन करना और पार्टी कार्यालय के लिए जगह आवंटित करना शामिल है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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