एवियन में पीएम मोदी और मैक्रों की मुलाकात, जी-7 सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री ने जताया आभार

एवियन,। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार को एव‍ियन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी यहां जी-7 समिट में शामिल होने पहुंचे हैं। एवियन पहुंचने पर मोदी और मैक्रों ने एक-दूसरे को गले लगाया और शुभकामनाएं दीं। दोनों नेता उस आउटरीच सत्र से पहले मिले, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य जी-7 देशों के नेता भी शामिल हो रहे हैं। एवियन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वह दुनिया के नेताओं से मिलने और अहम वैश्विक मुद्दों पर विचार साझा करने को लेकर उत्साहित हैं। पीएम ने एवियन में स्वागत के लिए राष्‍ट्रपत‍ि मैक्रों का आभार भी जताया। पीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, ”मेरे दोस्त राष्ट्रपति मैक्रों, एवियन में स्वागत के लिए आपका धन्यवाद।” उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, “जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस के एवियन पहुंच गया हूं। दुनिया के नेताओं के साथ बातचीत करने और महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने का इंतजार है। भारत एक ज्यादा टिकाऊ और समृद्ध दुनिया के लिए मिलकर काम करने की कोशिशों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।” प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों के निमंत्रण पर एवियन पहुंचे हैं। इस साल जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की 13वीं भागीदारी है और प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इस सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा पहुंचे, जहां स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलीन ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि पीएम मोदी और पार्मेलीन ने गर्मजोशी से मुलाकात की और भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। जायसवाल ने ‘एक्‍स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए एवियन जाते हुए जिनेवा पहुंचे। उनका स्वागत स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलीन ने किया। दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की और भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी को और मजबूत करने की बात दोहराई।” शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी-7 देशों के नेताओं, आमंत्रित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसमें नए सहयोग बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय एकजुटता मजबूत करने, सभी के लिए संतुलित और टिकाऊ आर्थिक विकास, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सुरक्षित और तेज तरीके से लागू करने जैसे विषय शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन के दौरान कई देशों के नेताओं के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने कहा कि जी-7 बैठकों में भारत की लगातार भागीदारी यह दिखाती है कि दुनिया भारत की भूमिका और योगदान को तेजी से पहचान रही है। भारत शांति, सुरक्षा, विकास और पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर लगातार अपनी बात रखता रहा है। उन्होंने कहा कि जी-7 में भारत ने जी-20 और ‘वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ समिट’ जैसे मंचों की तरह ही विकासशील देशों की चिंताओं और जरूरतों को सामने रखा है। उन्होंने बताया कि इस साल फ्रांस की अध्यक्षता में होने वाले जी-7 सम्मेलन में कुछ खास मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें आर्थिक असंतुलन को कम करना, सबके लिए विकास को बढ़ावा देना, जरूरी खनिज और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाना, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, बड़े भू-राजनीतिक संकटों का समाधान और संगठित अपराध व गैरकानूनी गतिविधियों से निपटना शामिल हैं। एवियन में कार्यक्रम खत्म करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी गुरुवार को पेरिस जाएंगे। वहां वह द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे और यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप कार्यक्रम ‘विवटेक’ में शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित कर सकते हैं।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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