चीन ने संयुक्त राष्ट्र में ‘ग्लोबल साउथ को पर्याप्त प्रतिनिधित्व’ देने की वकालत की

बीजिंग। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को संयुक्त राष्ट्र में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर में बढ़ते राजनीतिक और आर्थिक विवादों के कारण संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और प्रभावशीलता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, बुधवार को बीजिंग में ‘वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और समान बनाने’ से जुड़े एक श्वेत पत्र (व्हाइट पेपर) को जारी करते हुए एक प्रेस वार्ता में वांग यी ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चाहे कोई देश बड़ा हो या छोटा, शक्तिशाली हो या कमजोर, विकसित हो या विकासशील सभी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं। वांग ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) के देशों की आवाज को अधिक महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया। चीन के विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया लगातार नई चुनौतियों का सामना कर रही है, जिससे कई वैश्विक संकट एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “सभ्यता का जहाज अब खतरनाक जलक्षेत्र में प्रवेश कर चुका है, जहां छिपी हुई चट्टानें और भीषण तूफान मौजूद हैं।” वांग ने कहा कि मौजूदा विवाद गहरे और लंबे समय से चले आ रहे मतभेदों को उजागर करते हैं। उन्होंने “ब्लैक स्वान” और “ग्रे राइनो” जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि अप्रत्याशित संकटों और स्पष्ट दिखने वाले लेकिन नजरअंदाज किए जाने वाले खतरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मध्य पूर्व की स्थिति पर वांग यी ने सभी पक्षों से तत्काल युद्धविराम की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए एक टिकाऊ सुरक्षा ढांचा विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ऐसे प्रयास करने चाहिए, जो मध्य पूर्व में दीर्घकालिक सुरक्षा और स्थिरता की नींव रख सकें। वांग ने कहा कि व्हाइट पेपर का मकसद वैश्विक चुनौतियों के असरदार जवाबों पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाना है, और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिष्ठा और केंद्रीय भूमिका को बनाए रखना इस पहल की सफलता के लिए जरूरी है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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