नागपुर में केंद्र मिलने पर खुश, लेकिन एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल : मोहम्मद तालिब

नागपुर। 21 जून को आयोजित होने वाली नीट यूजी से ठीक पहले परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर चर्चा में आए नागपुर के छात्र अब्दुल्लाह के मामले में आखिरकार समाधान निकल आया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने छात्र का परीक्षा केंद्र संशोधित करते हुए नागपुर में आवंटित कर दिया है। इसके बाद परिजनों ने राहत की सांस ली है। दरअसल, छात्र अब्दुल्लाह ने आवेदन के दौरान परीक्षा केंद्र के लिए नागपुर, वर्धा और भंडारा को अपनी प्राथमिकताओं में चुना था। इसके बावजूद उसे परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी (यूएई) आवंटित कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद परिजनों ने एनटीए से शिकायत दर्ज कराई और केंद्र आवंटन में हुई इस कथित त्रुटि को लेकर सवाल उठाए। विवादों के बीच, छात्र का एडमिट कार्ड भी सामने आया है। इस एडमिट कार्ड में छात्र के परीक्षा केंद्र के रूप में नागपुर का ‘पीएम श्री केन्द्रीय विद्यालय अजनी’ दर्ज है। इसी बीच, एनटीए का दावा किया कि केंद्र चयन अभ्यर्थी ने ही किया था और एजेंसी की ओर से कोई गलती नहीं हुई। हालांकि, छात्र के पिता मोहम्मद तालिब ने दावे को सिरे से खारिज कर दिया। मामले के तूल पकड़ने के बाद एनटीए ने छात्र का केंद्र बदलते हुए नागपुर में ही परीक्षा केंद्र आवंटित कर दिया। इसके बाद मोहम्मद तालिब ने उन सभी लोगों का आभार जताया जिन्होंने इस मुद्दे को उठाने और समाधान तक पहुंचाने में सहयोग किया। आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि जद्दोजहद और सभी लोगों के समर्थन की वजह से हमें कामयाबी मिली है। हम लोग बहुत खुश हैं कि परीक्षा केंद्र नागपुर में मिल गया है। हालांकि, उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र आवंटन में हुई इस गड़बड़ी के कारण उनके बेटे को गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। इसके लिए एजेंसी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए। यही कारण है कि अब वह परीक्षा देने के लिए भी तैयार नहीं हो रहा है। फिर भी हम उसे समझाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह परीक्षा में शामिल होता है तो यह अच्छी बात होगी। मोहम्मद तालिब ने कहा कि परिवार पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उन्होंने ऐसा कोई विकल्प नहीं चुना था। आवेदन पत्र में केवल तीन जिलों, नागपुर, वर्धा और भंडारा, का चयन किया गया था और नागपुर को प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा कि हमने फॉर्म में तीन जिलों का चयन किया था। नागपुर हमारी पहली प्राथमिकता थी। फिर अबू धाबी का केंद्र कैसे आवंटित हो गया, यह हमें समझ नहीं आता। एनटीए के आरोपों पर फिलहाल मैं शांत हूं, लेकिन भविष्य में इस पर प्रतिक्रिया दूंगा।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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