नीट-यूजी री-एग्जाम संपन्न: छात्रों ने फिजिक्स को बताया कठिन, सुरक्षा व्यवस्थाओं को सराहा

नई दिल्ली। देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर रविवार को नीट यूजी री-एग्जाम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए। परीक्षा समाप्त होने के बाद केंद्रों से बाहर निकले छात्रों ने प्रश्नपत्र के लेवल, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों पर किए गए इंतजामों को लेकर प्रतिक्रिया दी। अधिकांश छात्रों का कहना था कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के प्रश्न अपेक्षाकृत आसान या मध्यम स्तर के थे, जबकि फिजिक्स का पेपर सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। कर्नाटक के बेंगलुरु में परीक्षा देकर बाहर निकले एक छात्र ने कहा कि फिजिक्स का पेपर काफी कठिन था, जबकि बाकी विषयों का पेपर संतुलित रहा। छात्र ने बताया कि वह पिछली परीक्षा में क्वालिफाई कर चुका था, लेकिन इस बार फिजिक्स की कठिनाई को देखते हुए परिणाम को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है। एक अन्य छात्र ने कहा कि पिछली बार की तुलना में इस बार पेपर बेहतर रहा। हालांकि, फिजिक्स सेक्शन में उसे कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वहीं, एक छात्रा ने बताया कि कुल मिलाकर पेपर ठीक था, लेकिन फिजिक्स का स्तर पिछले प्रश्नपत्र की तुलना में अधिक कठिन महसूस हुआ। उत्तर प्रदेश के अमेठी में परीक्षा देकर निकले छात्रों ने परीक्षा केंद्रों पर की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। एक परीक्षार्थी ने कहा कि पेपर अच्छा था और किसी प्रकार की परेशानी नहीं हुई। उसके अनुसार बायोलॉजी आसान, जबकि फिजिक्स अपेक्षाकृत कठिन था। एक छात्रा ने कहा कि परीक्षा ठीक गई है। हालांकि उसे चयन को लेकर बहुत अधिक उम्मीद नहीं है। वहीं, दूसरी छात्रा ने विश्वास जताया कि उसके चयन की संभावना है। छात्रों ने केंद्रों पर सुरक्षा और प्रबंधन को संतोषजनक बताया। जम्मू में परीक्षा देने वाले छात्रों ने कहा कि इस बार सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा संचालन में काफी सुधार देखने को मिला। एक छात्र ने कहा कि परीक्षा अच्छी रही और व्यवस्थाएं बेहतर थीं। एक छात्रा ने बताया कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री का पेपर ठीक था, लेकिन फिजिक्स काफी कठिन रहा। एक अन्य छात्र ने कहा कि पेपर संतोषजनक रहा और अब सभी की निगाहें परिणाम पर टिकी हैं। कई अन्य छात्रों ने भी फिजिक्स को सबसे चुनौतीपूर्ण विषय बताया। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक छात्रा ने कहा कि पिछली परीक्षा का प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान था, जबकि इस बार का पेपर काफी मुश्किल रहा। उसके अनुसार बायोलॉजी और केमिस्ट्री ठीक थे, लेकिन फिजिक्स ने सबसे ज्यादा चुनौती दी। एक अन्य छात्र ने भी कहा कि फिजिक्स का स्तर पिछली परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन था, जबकि बाकी विषय संतुलित थे। नोएडा में परीक्षा देने वाली एक छात्रा ने कहा कि पेपर मुश्किल जरूर था, लेकिन इतना भी कठिन नहीं था कि उससे बहुत बड़ा अंतर पड़ जाए। उसने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) आमतौर पर चुनौतीपूर्ण प्रश्नपत्र तैयार करती है और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला। छात्रा ने कहा कि पेपर लीक को लेकर पहले निराशा थी, लेकिन दोबारा परीक्षा होने के बाद अब उसे संतोष है। वहीं, एक छात्र ने कहा कि प्रश्नपत्र न तो बहुत आसान था और न ही बहुत कठिन, हालांकि फिजिक्स सेक्शन में कुछ सवाल चुनौतीपूर्ण थे। एक अन्य छात्र ने बताया कि पेपर अच्छा, लेकिन काफी लंबा था। उसने कहा कि फिजिक्स में कॉन्सेप्ट आधारित और न्यूमेरिकल प्रश्नों पर ज्यादा जोर दिया गया था। छात्र ने कहा कि पिछली परीक्षा में स्टेटमेंट-बेस्ड प्रश्न अधिक थे, जबकि इस बार ऐसे प्रश्न अपेक्षाकृत कम देखने को मिले। अन्य छात्रों ने भी बायोलॉजी और केमिस्ट्री को संतुलित तथा फिजिक्स को कठिन बताया। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में परीक्षा देने वाली एक छात्रा ने कहा कि पेपर अच्छा था और पिछली परीक्षा की तुलना में बेहतर अनुभव रहा। उसने बताया कि फिजिक्स कुछ कठिन था, लेकिन कुल मिलाकर परीक्षा अच्छी रही और अब उसे सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है। कर्नाटक के दावणगेरे में एक छात्रा ने कहा कि परीक्षा अच्छी रही, लेकिन पिछली बार की तुलना में फिजिक्स अधिक कठिन लगा। उसने बताया कि बायोलॉजी और केमिस्ट्री के स्तर सामान्य थे और कुल मिलाकर उसका पेपर अच्छा गया है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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