भरत भूषण तिवारी मुठभेड़ केस में पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर, स्वतंत्र जांच की मांग

पटना। बिहार के भोजपुर जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत को लेकर विवाद और गहरा गया है। पटना हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। वकील मुकेश कुमार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर निष्पक्ष जांच और मुठभेड़ के लिए जिम्मेदार पाए गए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। याचिकाकर्ता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया है। जनहित याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत के कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। याचिका के अनुसार, मुठभेड़ से पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें भरत तिवारी पिस्तौल लिए हुए दिखाई दे रहे थे। याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि अगर वह वाकई हथियारबंद था, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया या हथियार जब्त क्यों नहीं किया। भरत भूषण तिवारी के परिवार ने लगातार आरोप लगाया है कि मुठभेड़ फर्जी थी। उनके अनुसार, घटना के समय वह आत्मसमर्पण कर चुका था और निहत्था था। परिवार ने विरोध प्रदर्शनों के बाद मृतक के पिता, भाई और कई ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने पर भी आपत्ति जताई है। भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने ऑपरेशन के दौरान पुलिस टीम पर 10 से 12 गोलियां चलाईं। पुलिस के अनुसार, अधिकारियों ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसके परिणामस्वरूप वह घायल हो गया। घायल भरत को पहले आरा सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटना के पीएमसीएच रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। बिहार सरकार ने घटना की न्यायिक जांच की घोषणा कर दी है। जांच एक सेवानिवृत्त हाई कोर्ट के जज द्वारा किए जाने की उम्मीद है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने बताया है कि सरकार द्वारा न्यायिक जांच की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन जांच से संबंधित औपचारिक अधिसूचना अभी तक जारी नहीं की गई है। प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई के तहत, इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। खबरों के अनुसार, शाहपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ को भी निलंबित कर दिया गया है। जनहित याचिका में पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा की मांग की गई है और दोषी पाए जाने पर जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। इस घटना के बाद बिहार के कई जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए हैं। गोपालगंज में सैकड़ों नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने पोस्ट ऑफिस चौक से थाना चौक तक कैंडल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुठभेड़ में कानूनी प्रक्रियाओं और मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ है। कई प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि भरत तिवारी ने गोलीबारी से पहले आत्मसमर्पण कर दिया था और इस घटना को सुनियोजित हत्या बताया। कैमूर जिले में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां राजनीतिक कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने भभुआ नगर पालिका मैदान से एकता चौक तक आक्रोश मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान, नेताओं ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग की।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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