आंध्र प्रदेश: सीएम नायडू ने अधिकारियों को राजनीतिक दलों की साजिशों के प्रति आगाह किया

अमरावती। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को अधिकारियों से कहा कि वे राज्य में कुछ राजनीतिक दलों की साजिशों को लेकर सतर्क रहें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पार्टियां घटनाओं को जाति या धर्म का रंग देकर और उन्हें विवादों में बदलकर हर मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही हैं। राज्य सचिवालय में रियल टाइम गवर्नमेंट सोसाइटी (आरटीजीएस) सेंटर में विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि ये पार्टियां सरकार के खिलाफ झूठे प्रचार और दुर्भावनापूर्ण अभियानों के जरिए कर्मचारियों और अधिकारियों की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं। मुख्यमंत्री नायडू ने जोर दिया कि कर्मचारियों और अधिकारियों को झूठे प्रचार और नफरत फैलाने वाली घटनाओं को रोकने के लिए सक्रिय रूप से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाल ही में कुछ अपराध मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हुए जबकि अन्य ड्रग्स और गांजे की लत से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि सरकार पुराने मामलों को सुलझा रही है। उन्होंने कहा, “2019 में हुए अपराधों का अब पता लगाया जा रहा है और अपराधियों को पकड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें सजा मिल रही है। इन तथ्यों को जनता तक पहुंचाना जरूरी है। गलत काम करने वाले बच नहीं सकते।” मुख्यमंत्री ने वाहन नंबर प्लेट से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन करने का आह्वान किया और जोर दिया कि उन्हें तय मानकों के अनुसार ही लगाया जाना चाहिए। उन्होंने क्वांटम पार्क और सेमीकंडक्टर पार्क स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और बताया कि दिसंबर में एक क्वांटम कंप्यूटर लॉन्च किया जाना है। नायडू ने कहा, “हरियाली बढ़ाने, स्वच्छता बनाए रखने, जल सुरक्षा सुनिश्चित करने, भूजल को रिचार्ज करने, जल संसाधनों के संरक्षण और नदी के पानी को प्रदूषण से बचाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता से प्राप्त शिकायतों, जिनमें पब्लिक ग्रीवेंस सिस्टम (पीजीआरएस) के तहत आने वाली शिकायतें भी शामिल हैं, का मानवीय दृष्टिकोण से समाधान करें। उन्होंने कर्मचारियों और अधिकारियों में सॉफ्ट स्किल्स विकसित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम कर्मचारियों को नए तरीके से सोचने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारियां सौंपेंगे। उन्हें शिकायतकर्ताओं की जगह खुद को रखकर शिकायतों को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। अधिकारियों और कर्मचारियों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए आने वाले नागरिकों के साथ विनम्रता से पेश आना चाहिए। इससे प्रशासन के प्रति जनता में सकारात्मक धारणा बनती है।” नायडू ने जोर दिया कि मानव संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को अपनी प्रशासनिक क्षमताओं को लगातार बढ़ाने और बदलते समय के अनुसार अपने काम के तरीकों को ढालने की जरूरत है। जमीनी हकीकत के अनुरूप फैसले केवल फील्ड विजिट के जरिए ही लिए जा सकते हैं और मंत्रियों, अधिकारियों और कर्मचारियों को ऐसी यात्राओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश को एक मजबूत मानव संसाधन प्रणाली की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमने कर्मचारियों और अधिकारियों को प्रशासनिक सुधारों के बारे में ट्रेनिंग दी है। पहले फाइलों को निपटाना एक बहुत बड़ा काम था, लेकिन टेक्नोलॉजी के आने से यह काफी आसान हो गया है। नई सोच के बिना सिस्टम ठप पड़ जाएंगे और बेअसर हो जाएंगे।” इस बैठक में मुख्य सचिव साई प्रसाद, डीजीपी हरीश कुमार गुप्ता और अलग-अलग विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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