भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन राज्य सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक, 2026 सदन में पेश कर दिया। इस विधेयक पर मंगलवार को चर्चा होगी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने चर्चा की तारीख तय कर दी है। सरकार की ओर से राज्यमंत्री गौतम टेटवाल ने यूसीसी विधेयक सदन के पटल पर रखा। यह मानसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। हालांकि, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सोमवार की विधानसभा की कार्यसूची में इस विधेयक का उल्लेख नहीं था। रविवार को जगदीशपुर में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यूसीसी विधेयक, 2026 को मंजूरी दी गई थी। कैबिनेट ने तय किया था कि इस विधेयक समेत अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को मानसून सत्र के दौरान सदन में पेश कर पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। उसी निर्णय के तहत सरकार ने सोमवार को यह विधेयक प्रस्तुत किया। राज्य में यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए 27 अप्रैल 2026 को न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति में शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किया गया। समिति ने प्रचलित कानूनों का अध्ययन करने के साथ प्रदेशभर में जन-परामर्श बैठकों के जरिए विभिन्न वर्गों से सुझाव भी लिए। सरकार के अनुसार जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए एक समर्पित वेब पोर्टल बनाया गया। इसके अलावा 3.49 करोड़ एसएमएस भेजे गए और जिला व राज्य स्तर पर 50 जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं, जिनसे 1,134 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। सरकार का दावा है कि इस प्रक्रिया में लगभग 94 प्रतिशत लोगों ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया। राज्य सरकार ने इस विधेयक को नारी सशक्तिकरण और महिलाओं के सम्मान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा, महिलाओं को संपत्ति में पुरुषों के समान अधिकार मिलेंगे और विवाहित व्यक्ति के लिव-इन संबंध में रहने पर अधिकतम पांच वर्ष की सजा का प्रावधान किया गया है। मध्य प्रदेश से पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम की विधानसभाएं यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक पारित कर चुकी हैं। यदि यह विधेयक मध्य प्रदेश विधानसभा से भी पारित हो जाता है, तो यूसीसी लागू करने वाला मध्य प्रदेश देश का चौथा राज्य बन जाएगा।





