अदाणी ग्रीन एनर्जी ने वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में अब तक का सबसे अधिक 4,122 करोड़ रुपए का एबिटडा किया दर्ज

अहमदाबाद, 22 जुलाई (आईएएनएस)। अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) ने बुधवार को कहा कि वित्त वर्ष 27 की जून तिमाही में उसकी ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता में सालाना आधार पर 27 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इससे कंपनी का एबिटडा अब तक के सबसे उच्चतम तिमाही स्तर 4,122 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।

स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में अदाणी ग्रीन एनर्जी ने कहा कि कंपनी की ऑपरेशनल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता बढ़कर 20,142 मेगावाट हो गई है, जो कि सालाना आधार पर क्षमता में 27 प्रतिशत की वृद्धि को दिखाता है।

एजीईएल ने बताया कि वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में बिजली आपूर्ति से आय सालाना आधार पर 29 प्रतिशत बढ़कर 4,280 करोड़ रुपए हो गई है, जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही में 3,094 करोड़ रुपए थी।

वहीं, बिजली आपूर्ति से एबिटडा सालाना आधार पर 33 प्रतिशत बढ़कर अब तक का सबसे अधिक 4,122 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि पिछले वर्ष की समान तिमाही में 2,944 करोड़ रुपए था। वहीं, एबिटडा मार्जिन 94 प्रतिशत रहा है, जो कंपनी की मुनाफा कमाने की मजबूती को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 27 की जून तिमाही में कंपनी का कैश प्रॉफिट सालाना आधार पर 28 प्रतिशत बढ़कर 2,225 करोड़ रुपए हो गया है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में खावड़ा में 1,972 मेगावाट की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) क्षमता स्थापित की, जिससे वहां की कुल स्थापित क्षमता बढ़कर 3,551 मेगावाट हो गई। यह दुनिया में एक ही स्थान पर स्थापित सबसे बड़ी बीईएसएस परियोजनाओं में से एक है।

एजीईएल ने बताया कि वह वित्त वर्ष 2026-27 तक 10,000 मेगावाट से अधिक अतिरिक्त बीईएसएस क्षमता जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है, ताकि 2030 तक 50,000 मेगावाट के दीर्घकालिक क्षमता के अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच सके।

एजीईएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) आशीष खन्ना ने कहा, “हमने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत गति के साथ की है। अनुशासित क्रियान्वयन की बदौलत हमने 20 गीगावॉट परिचालन क्षमता का महत्वपूर्ण आंकड़ा पार किया है, साथ ही बाजार में मांग का माहौल भी मजबूत हुआ है। तिमाही के दौरान भारत में बिजली की मांग में फिर से तेजी आने के साथ, हमारे बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो ने देश की स्वच्छ ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों को विश्वसनीय रूप से पूरा करने में हमारी मदद की, जबकि हमने परिचालन प्रदर्शन के मामले में उद्योग में अग्रणी स्थिति भी बनाए रखी।”

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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