सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक स्थगित, लोकसभा स्पीकर बोले- परीक्षा बिल पर बहस का समय 6 घंटे बढ़ाया जा सकता है

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा में विपक्ष के सदस्यों की लगातार नारेबाजी के कारण सोमवार को सदन की कार्यवाही में बाधा पड़ी। यह सब तब हुआ जब सरकार ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर विस्तृत चर्चा की अपील कर रही थी। इसके बाद सदन को शाम 5 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

यह दिन का तीसरा स्थगन था, क्योंकि केंद्र द्वारा पेपर लीक विरोधी कानून पेश किए जाने के बाद विपक्ष की तरफ से बार-बार विरोध प्रदर्शन देखा गया।

पेपर लीक विरोधी विधेयक को दिन में पहले विपक्ष के सदस्यों के जोरदार विरोध के बीच लोकसभा में पेश किया गया था, जिससे सदन प्रस्तावित कानून पर कोई ठोस चर्चा नहीं कर सका।

स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखने की अपील की और विपक्षी सांसदों से आग्रह किया कि वे नारेबाजी और प्लेकार्ड दिखाने के बजाय अपनी सीटों पर लौटें और बहस में भाग लें।

उन्होंने सदस्यों को यह भी भरोसा दिलाया कि व्यापक चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा और कहा कि जरूरत पड़ने पर बहस का समय छह घंटे तक बढ़ाया जा सकता है।

बिरला ने कहा, “नारेबाजी और प्लेकार्ड दिखाने से इस मुद्दे पर चर्चा नहीं होगी। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि सदन में अपने विचार और राय रखने के लिए समय को छह घंटे या उससे भी अधिक बढ़ाएं, ताकि हर कोई आपकी राय सुन सके और देश के छात्र, जो इस मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं, उन्हें प्रभावी कार्रवाई का भरोसा मिल सके।”

उन्होंने कहा, “आपको इस मुद्दे पर अपने विचार रखने चाहिए, न कि नारे लगाने चाहिए। आपको सदन में मुद्दे पर चर्चा करने के लिए चुना गया है।”

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बहस के लिए समय आवंटित करने के लिए स्पीकर का धन्यवाद करते हुए सवाल किया कि विपक्ष चर्चा क्यों रोक रहा है, जबकि कई सदस्यों ने दिन में पहले ही इस मुद्दे पर संशोधन के नोटिस दिए थे।

उन्‍होंने कहा कि आपको काफी समय दिया गया है और कई संशोधन नोटिस भी मिले हैं। इसका मतलब है कि कई सदस्य इस अहम बिल पर अपनी राय रखना चाहते हैं। बिल पेश करने और संशोधन के लिए नोटिस मिले हैं। तो, एक तरफ तो इतने सारे संशोधन नोटिस हैं। आपने काफी समय देने की इच्छा भी जताई है। तो फिर वे (विपक्ष) चर्चा रोकने के लिए नारे क्यों लगा रहे हैं? मुझे यह समझ नहीं आ रहा।

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि देश भर के छात्र कार्यवाही पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और तर्क दिया कि कानून पर चर्चा में देरी करने से परीक्षा से जुड़े मुद्दों को हल करने के प्रति संसद की प्रतिबद्धता के बारे में ‘बहुत गलत संदेश’ जाएगा।

रिजिजू ने आगे कहा, “मैं कांग्रेस पार्टी से फिर से आग्रह करता हूं कि वह अपने सहयोगियों को भरोसा दिलाए और हमें बिल पर चर्चा शुरू करने दे। स्पीकर जितना भी समय दें, हमें मंजूर है।”

सदन की कार्यवाही स्थगित करने से पहले, स्पीकर बिड़ला ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आपस में चर्चा करने और आम सहमति बनाने की अपील की ताकि दिन में बाद में बिल पर बहस हो सके।

बिड़ला ने कहा, “मैं सभी प्रमुख दलों के सदस्यों से आग्रह करता हूं कि वे आपस में और चर्चा करें और आम सहमति बनाएं। हम निश्चित रूप से इस मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं। इसलिए, मैं आपको आज तीन घंटे और दे रहा हूं। सरकार और सभी को शाम 5 बजे तक आम सहमति बनानी होगी ताकि शाम 5 बजे इस बिल पर चर्चा हो सके।”

इसके बाद सदन की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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