लगातार 5 दिनों की गिरावट के बाद बाजार में छाई हरियाली, सेंसेक्स 776 अंक चढ़ा, निफ्टी करीब 1 प्रतिशत ऊपर

मुंबई, 27 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान द्वारा हमलों को स्थगित करने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट के चलते हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार शानदार तेजी के साथ हरे निशान में बंद हुआ। इस बीच घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों सेंसेक्स और निफ्टी 50 में 1 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। बाजार में यह तेजी पिछले लगातार 5 कारोबारी सत्रों में गिरावट के बाद आई है।

बाजार बंद होने के समय 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 776.01 अंक यानी 1.02 प्रतिशत बढ़कर 76,835.78 पर पहुंच गया, तो वहीं एनएसई का निफ्टी 50 228.50 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की शानदार बढ़त के साथ 23,995.95 पर बंद हुआ।

व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.11 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.31 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई।

वहीं, सेक्टरवार देखें तो दिन के कारोबार में सभी सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। निफ्टी मीडिया 2.4 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाला क्षेत्र बनकर उभरा, इसके बाद निफ्टी आईटी 2.3 प्रतिशत की बढ़त के साथ दूसरे स्थान पर रहा। निफ्टी रियल्टी में 2.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि निफ्टी ऑटो और निफ्टी फार्मा में क्रमशः 1.6 प्रतिशत और 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

इसके अलावा, निफ्टी एफएमसीजी में 1 प्रतिशत, निफ्टी बैंक में 0.7 प्रतिशत, निफ्टी इंफ्रा में 0.66 प्रतिशत, निफ्टी मेटल में 0.6 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.45 प्रतिश, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.42 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 0.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

सेक्टरवार विश्लेषण करें तो निफ्टी आईटी, निफ्टी मीडिया और निफ्टी रियल्टी ने बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस का प्रदर्शन खराब रहा। निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मेटल ने लगातार तीन दिनों से जारी गिरावट को तोड़ते हुए अपने बाजार में तेजी दर्ज की।

निफ्टी में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले शेयरों में इटरनल, इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, मैक्स हेल्थ और श्रीराम फाइनेंस शामिल रहे, जबकि नुकसान उठाने वाले शेयरों में ओएनजीसी, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, कोल इंडिया, पावर ग्रिड और डॉ रेड्डीज लैब्स शामिल रहे।

बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) पिछले सत्र के लगभग 476 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 481 लाख करोड़ रुपए हो गया, जिससे निवेशकों को एक ही सत्र में 5 लाख करोड़ रुपए का लाभ हुआ।

इस बीच, एक मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि पश्चिम एशिया में हमलों पर फिलहाल विराम लगने से आयात लागत और महंगाई बढ़ने की आशंकाएं कम हुई हैं, जिससे शेयर बाजार में राहत भरी तेजी देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट और लंबी अवधि के बॉन्ड यील्ड में कमी ने भी इस उम्मीद को मजबूत किया है कि स्थिति का स्थायी समाधान निकल सकता है। साथ ही, बाजार में लॉन्ग अनवाइंडिंग के संकेत भी देखने को मिले हैं, जो निवेशकों की धारणा में सुधार का संकेत देते हैं।

एक्सपर्ट के अनुसार, इस सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की प्रमुख मौद्रिक नीति बैठकों पर बाजार की नजर रहेगी। माना जा रहा है कि ये केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों को यथावत रखने के लिए अधिक सहज स्थिति में हो सकते हैं।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि घरेलू मोर्चे पर भी हालात सकारात्मक नजर आ रहे हैं। देश में बारिश की कमी (मानसून घाटा) से महंगाई के मोर्चे पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा, पहली तिमाही के कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे हैं और कारोबारी गतिविधियों को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण भी बाजार की धारणा को मजबूती दे रहा है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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