आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करने वाली 10वीं की छात्रा ने आत्महत्या की

अमरावती, 27 जुलाई (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के पोलावरम जिले में एक सरकारी स्कूल में ‘मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग’ के दौरान आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू के साथ मंच साझा करने वाले 10वीं कक्षा के एक छात्रा ने सोमवार को आत्महत्या कर ली।

रामपाचोडावरम के जिला परिषद हाई स्कूल में ‘मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग 4.0 के दौरान मुख्यमंत्री के बगल में बैठकर बोलने वाली मुर्रम शिवानी ने इर्लापल्ली गांव में अपनी दादी के घर पर आत्महत्या कर ली।

लड़की ने हाथ से लिखा एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उसने अपने माता-पिता के सपने पूरे न कर पाने के लिए उनसे माफी मांगी। उसके इस कठोर कदम का कारण पता नहीं चल सका।

लड़की के माता-पिता कोरुकोंडा के एक होटल में काम करते हैं, जबकि वह अपनी दादी के साथ रहती थी और रामपाचोडावरम के सरकारी हाई स्कूल में पढ़ती थी।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पढ़ाई में होनहार मानी जाने वाली शिवानी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में ‘मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग 4.0 में अपने भाषण से सबका ध्यान खींचा था। उसने कड़ी मेहनत करने और अगले साल ‘शाइनिंग स्टार अवॉर्ड’ जीतने की इच्छा जताई थी।

भाषण के बाद, मुख्यमंत्री ने उसे बुलाया और अपने बगल में बिठाया। उन्होंने उससे बातचीत भी की थी। मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि मुर्रम शिवानी के निधन से उन्हें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को शिवानी की मौत की गहन जांच करने का आदेश दिया।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि यह दुखद है कि रामपाचोडावरम में मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग के दौरान मंच पर इतने उत्साह के साथ बोलने वाली शिवानी ने अपनी जान दे दी। मुझे उस दिन अपनी पढ़ाई और अपनी बड़ी महत्वाकांक्षाओं के बारे में मुझसे कही गई उसकी बातें याद हैं।

उन्होंने कहा, “इतने उज्ज्वल भविष्य वाली आदिवासी लड़की का इस तरह से जान गंवाना दिल तोड़ने वाला है। चाहे कारण कुछ भी हों, यह बात मुझे बहुत परेशान करती है कि वह अपने सपने पूरे करने से पहले ही चली गई।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “छात्रों और युवाओं को चुनौतियों और मुश्किलों का सामना मजबूती से करना चाहिए। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे दबाव, निराशा या हताशा के आगे न झुकें। हर समस्या का समाधान होता है। कृपया अपना दुख और परेशानी अपने परिवार, दोस्तों और अपनों के साथ साझा करें। दबाव से उबरें और अपने सपनों को सच करने के लिए आगे बढ़ें। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि सरकार हर तरह से आपके साथ खड़ी है।”

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने 24 जुलाई को रामपाचोडावरम के जिला परिषद हाई स्कूल में आयोजित मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग में हिस्सा लिया। उन्होंने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बातचीत की। उन्होंने छात्रों के साथ लंच भी किया।

राज्य सरकार, छात्रों की बेहतर प्रगति के लिए अभिभावकों, शिक्षकों और समुदायों को एक साथ लाने के मकसद से राज्य भर के सरकारी स्कूलों में ‘मेगा पैरेंट-टीचर मीटिंग का आयोजन कर रही है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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