काला सागर में जहाजों को लेकर यूक्रेन की चेतावनी, भारत समेत साझेदार देशों से सतर्क रहने की अपील

कीव, 27 जुलाई (आईएएनएस)। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने काला सागर में रूसी पोर्ट्स की ओर जाने और आने वाले विदेशी जहाजों के लिए खतरे को लेकर एक बयान जारी किया है।

यूक्रेनी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 2025–2026 में काला सागर में रूस के हमलों की वजह से नाविकों, समुद्री पायलटों और व्यापारी जहाजों के क्रू मेंबर्स सहित कई आम लोगों की मौत हुई। इसमें पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और यूक्रेन के समुद्री एक्सपोर्ट कॉरिडोर का इस्तेमाल करने वाले जहाजों पर हमले भी शामिल हैं।

बयान के अनुसार, भारत में यूक्रेन के दूतावास ने कहा है कि उसका दृढ़ विश्वास है कि रूस की आक्रामक कार्रवाइयों के कारण काला सागर और आजोव सागर में नागरिक जहाजों की आवाजाही पर मंडरा रहे खतरों और जोखिमों को क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति से जुड़ी किसी भी एहतियाती चेतावनी पर तत्काल प्रतिक्रिया देकर कम किया जा सकता है।

दूतावास ने कहा कि युद्ध के दौरान यूक्रेन लगातार अपने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, जिनमें भारत के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं, को रूस की कार्रवाइयों से नागरिक नौवहन पर बढ़ते खतरों के बारे में आगाह करता रहा है।

यूक्रेन ने अपने साझेदार देशों को उन कदमों की भी जानकारी दी है, जो वह सैन्य सामान की आपूर्ति रोकने और यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को समर्थन देने वाली लॉजिस्टिक आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करने के लिए उठा रहा है।

दूतावास ने कहा कि इन चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) के मंच पर भी औपचारिक रूप से उठाया गया है। इसके तहत 12 जून और 26 जून 2026 को जारी आईएमओ सर्कुलर लेटर्स के माध्यम से सदस्य देशों को अवगत कराया गया।

यूक्रेन ने यह भी कहा कि उसने भारत सरकार के समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए) द्वारा 23 जुलाई 2026 को जारी सर्कुलर-41 का संज्ञान लिया है। इस परिपत्र में काला सागर से गुजरने या वहां परिचालन करने वाले भारतीय जहाजों और भारतीय नाविकों वाले विदेशी ध्वजधारी जहाजों के लिए समुद्री सुरक्षा संबंधी परामर्श जारी किया गया है।

यूक्रेन का मानना है कि नाविकों की सुरक्षा, आम लोगों के नेविगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन इलाकों में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, जहां ऐसे खतरों की स्पष्ट पहचान हो, काबिल अधिकारियों द्वारा समय पर और बचाव के लिए कार्रवाई करना बहुत जरूरी है।

यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा की तरफ से भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर को एक चिट्ठी भी लिखी गई। इस पत्र में यूक्रेनी दूतावास ने उन भारतीय नाविकों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है, जिन्होंने काला सागर में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण अपनी जान गंवा दी।

विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि हमें उम्मीद है कि यूक्रेन के विदेश मंत्री के दिए गए प्रस्ताव के बाद, हमारे दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच जल्द ही बातचीत होगी, जिसमें काला सागर क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थिति पर विस्तार से चर्चा होगी।

समुद्री सुरक्षा को फिर से बहाल करने का एकमात्र टिकाऊ तरीका यह है कि रूस पर नागरिक जहाजों पर हमले बंद करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दबाव बढ़ाया जाए।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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