‘आज रात तक छात्रों की रिहाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन होगा’, तेजस्वी यादव की सरकार को चुनौती

पटना, 27 जुलाई (आईएएनएस)। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने छात्र आंदोलन के दौरान गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और उन पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि आज (सोमवार) रात तक छात्रों को रिहा नहीं किया गया और उनके खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो राजद पूरे बिहार में बड़ा जन आंदोलन खड़ा करेगा।

तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बिहार क्रांति और बदलाव की धरती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निर्दोष छात्रों को निशाना बनाकर उनके खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगा रही है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों को गोली लगी और जो अस्पताल में भर्ती हैं, उनके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि केवल एक छोटे सिपाही को निलंबित कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करे।

उन्होंने कहा कि सरकार बाद में यह न कहे कि उसे पहले से आगाह नहीं किया गया था। मुख्यमंत्री और सरकार में बैठे लोगों को अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यदि वे कानून व्यवस्था संभाल नहीं सकते तो पद छोड़ दें, लेकिन निर्दोष छात्रों की जान से खिलवाड़ न करें।

इससे पहले तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मी ने एके-47 से गोली चलाई। उन्होंने दावा किया कि शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन में पुलिस मैनुअल का उल्लंघन करते हुए एके-47 के इस्तेमाल का यह पहला मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर इस तरह गोली चलाई जाएगी तो भविष्य में वकीलों, शिक्षकों, डॉक्टरों, किसानों और अन्य नागरिकों की सुरक्षा की क्या गारंटी होगी।

तेजस्वी यादव ने मांग की कि गोली चलाने वाले पुलिसकर्मी के साथ-साथ संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी तत्काल कार्रवाई की जाए तथा गृह मंत्री की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कार्यशैली से बिहार में अराजक स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने दोहराया कि छात्रों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो राजद राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगा।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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