नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने बुधवार को छात्र प्रदर्शनकारियों के संदर्भ में बात करते हुए विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से कहा कि वे सोच-समझकर तय करें कि किसका समर्थन करना है।
चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास की उमर खालिद से जुड़ी एक पुरानी पोस्ट शेयर की। इसके साथ उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें सौरव दास और उमर खालिद साथ नजर आ रहे हैं।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “उन वास्तविक छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए, जिन्होंने अपनी वास्तविक शिकायतों को लेकर प्रदर्शन किया, मैं कहूंगा कि इस तस्वीर और इसके संदेश को देखें और समझदारी से तय करें कि आप किसके साथ खड़े हैं।
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कुछ लोग विभाजनकारी विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर आपको लगता है कि आपका भविष्य ऐसे लोगों के हाथों बनेगा, जिनकी विचारधारा भारत को बांटना और तोड़ना है, तो आपको उनकी वास्तविकता समझने की जरूरत है।”
भाजपा नेता ने कहा कि किसी भी स्थिति में हिंसक प्रदर्शन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उन्होंने लिखा, “इस समूह के नेतृत्व में होने वाले प्रदर्शन और हिंसा को किसी भी नाम पर बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और न ही किया जाएगा, चाहे उसे छात्र आंदोलन ही क्यों न कहा जाए।”
देश की एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए चंद्रशेखर ने कहा, “जो भी व्यक्ति, कहीं भी, किसी भी नाम पर हमारे देश, हमारे लोकतंत्र और हमारी अखंडता को कमजोर करने की कोशिश करता है, उसका विरोध करना हम सभी भारतीयों की जिम्मेदारी है। हम एक राष्ट्र के रूप में इतनी दूर इसलिए नहीं आए हैं कि ऐसे लोग हमें कमजोर कर दें। ऐसा नहीं होगा।”
पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा, “पीएस: अब मुझे भी इन ‘स्टूडेंट्स’ के बारे में समझ आने लगी है।”
चंद्रशेखर ने जो पोस्ट शेयर की, वह सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास की एक पुरानी ‘एक्स’ पोस्ट थी, जिसमें सौरव दास ने उमर खालिद को सपोर्ट किया था। उन्होंने लिखा, “सबसे बहादुर उमर खालिद से मुलाकात हुई। झूठे और बेबुनियाद आरोपों में पांच साल जेल में रहना भारतीय न्यायपालिका पर हमेशा के लिए एक धब्बा है। उनके और उनके कभी न खत्म होने वाले साहस के लिए मेरे मन में बेहद सम्मान है।”
चंद्रशेखर ने इसी पोस्ट और तस्वीर का हवाला देते हुए हाल के छात्र प्रदर्शनों से जुड़े कुछ लोगों की विचारधारा पर सवाल उठाए। उनकी यह टिप्पणी छात्र-नेतृत्व वाले प्रदर्शनों और विभिन्न एक्टिविस्ट समूहों की भूमिका को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल प्रदर्शन की प्रकृति और उसके उद्देश्य को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।





