नई दिल्ली, 29 जुलाई (आईएएनएस)। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के खिलाफ दिए गए अपने बयान को लेकर कहा कि उन्होंने कुछ भी असंसदीय नहीं कहा, बल्कि केवल सच रखा है। उन्होंने कहा कि अगर सच बोलने के लिए उन्हें दंडित किया जाता है, तो भी वह अपनी बात रखना जारी रखेंगी।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि उनके बयान को रिकॉर्ड से हटाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैं बल्कि महिलाओं के प्रति सोच और व्यवहार को दर्शाते हैं।
उन्होंने मंगलुरु के एक पब में महिलाओं पर हुए हमले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस मामले से जुड़े व्यक्ति को भाजपा में किसने शामिल किया था, यह सवाल उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही बाद में उसे पार्टी से हटा दिया गया हो, लेकिन उसके भाजपा में शामिल होने की तस्वीरें मौजूद हैं।
प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर सवाल उठाना जरूरी है। उन्होंने दोहराया कि संसद में कही गई उनकी बातों में ऐसा कुछ नहीं था जिसे असंसदीय माना जाए। उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाती रहेंगी।
उधर, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल सजा का प्रावधान करने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि पहले पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
शशि थरूर ने कहा कि यदि किसी ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है तो उसे सजा मिलनी चाहिए लेकिन कानून बनाने के साथ-साथ व्यवस्था को मजबूत करना भी जरूरी है।
उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्याय व्यवस्था पर पहले से काफी दबाव है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 में फास्ट ट्रैक अदालतों में बड़ी संख्या में नए मामले आए लेकिन उनमें से सीमित मामलों में ही फैसले हो सके। उन्होंने कहा कि केवल कानून पारित कर देने से न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता, इसके लिए न्यायिक क्षमता और संसाधनों को बढ़ाना होगा।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने भी परीक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री सदन में आकर जवाब दें, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में जवाब कैसे दिया जा सकता है।
गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों और उनके अभिभावकों के साथ हुए अन्याय के खिलाफ विपक्ष ने प्रश्नकाल के दौरान अपनी आवाज उठाई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे पर लोकसभा में अपनी बात रखेंगे।
कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने भी कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंताओं को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परीक्षा व्यवस्था में खामियों और केंद्रीय परीक्षा कराने के सरकार के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी सदन में छात्रों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को उठाएंगे और उनका भाषण महत्वपूर्ण होगा।
वहीं, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के एक ट्वीट से जुड़े सवाल पर के. सुरेश ने कहा कि ये सामान्य मामले हैं। उन्होंने बताया कि विजयन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था और राज्य सरकार पहले ही इन मामलों की जांच के निर्देश दे चुकी है।





