ग्लासगो: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। प्रतियोगिता के शुरुआती दौर में ही भारत ने कई खेलों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। 30 जुलाई 2026 तक भारत ने 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य पदकों के साथ कुल 15 पदक अपने नाम कर लिए हैं। प्रतियोगिता अभी जारी है और खास तौर पर बॉक्सिंग में भारत के कई खिलाड़ियों के सेमीफाइनल में पहुंचने से पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
मीराबाई चानू ने रचा इतिहास
भारत के लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक वेटलिफ्टर मीराबाई चानू की स्वर्णिम सफलता रही। उन्होंने महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग में 190 किलोग्राम का कुल वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का कारनामा किया। यह उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए बेहद खास मानी जा रही है।
मीराबाई की जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह लंबे समय से भारतीय भारोत्तोलन की सबसे बड़ी उम्मीदों में शामिल रही हैं। ग्लासगो में उनका प्रदर्शन बताता है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका अनुभव और निरंतरता अभी भी कायम है।
भारत को पैरा-एथलेटिक्स में भी बड़ी सफलता मिली।
दिलीप महादू गावित ने पुरुषों की 100 मीटर T47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया। उनका प्रदर्शन भारत के अभियान के सबसे यादगार क्षणों में शामिल रहा। उन्होंने शानदार फिनिश के साथ स्वर्ण अपने नाम किया और देश को तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया।
गावित की इस उपलब्धि ने यह भी साबित किया कि भारतीय पैरा-एथलीट अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुरली श्रीशंकर ने फिर जीता रजत
लंबी कूद में मुरली श्रीशंकर ने लगातार दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर अपनी निरंतरता कायम रखी। इससे पहले भी वह इस प्रतियोगिता में रजत जीत चुके हैं। ग्लासगो में उनकी सफलता भारतीय एथलेटिक्स के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
श्रीशंकर की उपलब्धि यह संकेत देती है कि भारतीय एथलेटिक्स अब केवल ट्रैक स्पर्धाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि फील्ड इवेंट्स में भी भारत लगातार पदक की दौड़ में बना हुआ है।
बॉक्सिंग से बड़ी उम्मीद
भारत के प्रदर्शन की सबसे बड़ी ताकतों में इस बार बॉक्सिंग नजर आ रही है। भारतीय मुक्केबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कम से कम 10 पदक पक्के कर दिए हैं, क्योंकि कई खिलाड़ी अपने-अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में पहुंच चुके हैं। हालांकि इन पदकों को आधिकारिक पदक तालिका में तब तक नहीं जोड़ा जाता जब तक संबंधित मुकाबलों के परिणाम तय नहीं हो जाते।
बॉक्सिंग में इस मजबूत प्रदर्शन से भारत को आगे कई स्वर्ण और रजत पदक मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। यही कारण है कि प्रतियोगिता के अंतिम चरण में भारत की पदक तालिका में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में भी मजबूती
भारत की पदक जीतने की परंपरा में वेटलिफ्टिंग का अहम योगदान रहा है और ग्लासगो में भी भारतीय भारोत्तोलकों ने अच्छा प्रदर्शन किया है। हरजिंदर कौर सहित भारतीय खिलाड़ियों ने इस स्पर्धा में पदक हासिल कर देश की स्थिति मजबूत की है। वहीं एथलेटिक्स में गुलवीर सिंह और अन्य भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने भी उम्मीदें जगाई हैं।
हालांकि सभी खेलों में परिणाम एक जैसे नहीं रहे। कुछ स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों को पदक से चूकना पड़ा है। तैराकी और कुछ अन्य इवेंट्स में भारत को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, लेकिन कुल मिलाकर अभियान संतुलित और सकारात्मक रहा है।
भारत की पदक उम्मीदें अभी बाकी
2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में अभी प्रतियोगिता का समापन नहीं हुआ है। इसलिए भारत की मौजूदा 15 पदकों की संख्या अंतिम आंकड़ा नहीं है। बॉक्सिंग के सेमीफाइनल, एथलेटिक्स की आगामी स्पर्धाओं और अन्य पदक मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदकों की संख्या बढ़ाने का मौका है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 10 खेलों में 215 पदक स्पर्धाएं आयोजित की जा रही हैं। प्रतियोगिता 23 जुलाई से 2 अगस्त 2026 तक ग्लासगो में हो रही है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का प्रदर्शन मजबूत और पदक की दृष्टि से उत्साहजनक रहा है। मीराबाई चानू का ऐतिहासिक स्वर्ण, दिलीप गावित का गेम्स रिकॉर्ड वाला गोल्ड, मुरली श्रीशंकर का लगातार दूसरा रजत और बॉक्सिंग में 10 पदकों का पक्का होना भारतीय अभियान की बड़ी उपलब्धियां हैं।
अब सबकी नजरें प्रतियोगिता के अंतिम दिनों पर हैं। बॉक्सिंग और एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ी अगर अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखते हैं, तो भारत की अंतिम पदक संख्या मौजूदा 15 से काफी आगे जा सकती है।





