5 अगस्त: वह ऐतिहासिक तारीख जब कश्मीर को मिला नया सवेरा और अयोध्या में गूंजे राम नाम के जयकारे

नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। इतिहास के पन्नों में कुछ तारीखें महज 24 घंटे का समय नहीं होतीं। वे एक पूरे युग के अंत और एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक बन जाती हैं। आधुनिक भारत के इतिहास में ‘5 अगस्त’ एक ऐसी ही अमिट तारीख है। यह वही दिन है जब 7 साल पहले कश्मीर से एक पुरानी व्यवस्था की विदाई हुई थी, और ठीक 6 साल पहले अयोध्या में एक सदी पुरानी प्रतीक्षा का अंत हुआ था।

5 अगस्त 2019 वह दिन था जब भारत सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया और राज्य को विशेष दर्जे से मुक्त कर दिया। आज इस फैसले के पूरे 7 साल हो चुके हैं।

एक वक्त था जब कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद का साया था। वहां भारत के संविधान की जगह एक अलग व्यवस्था और ‘रणबीर दंड संहिता’ लागू थी।

लेकिन 2019 के फैसले ने इस पूरी तस्वीर को पलट दिया। जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जिसका सीधा मतलब था कि कानून और व्यवस्था अब सीधे केंद्रीय गृह मंत्रालय के हाथ में आ गई। इस एक कदम से राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को खुली छूट मिली।

इन एजेंसियों ने जब जांच शुरू की, तो चौंकाने वाले सच सामने आए। पता चला कि पाकिस्तान से भारी मात्रा में पैसा आ रहा था। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतरीन तालमेल से ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया। हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठन आज वहां अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं।

अनुच्छेद 35ए के खात्मे के बाद महिलाओं के अधिकार बहाल हुए। अब गैर-कश्मीरी से शादी करने पर भी महिलाओं के संपत्ति और निवास के अधिकार नहीं छिनते। घरेलू हिंसा और बाल शोषण के खिलाफ जो कानून पूरे देश की महिलाओं की रक्षा करते हैं, वे अब कश्मीर में भी पूरी तरह लागू हैं।

स्थानीय निकायों और 2024 में हुए विधानसभा चुनावों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को फिर से मजबूत किया है। अब वहां स्कूल हिंसा के डर से बंद नहीं होते, बल्कि नई शिक्षा नीति के तहत बच्चे अपना भविष्य गढ़ रहे हैं। पर्यटन जो कभी खस्ताहाल था, आज अपने चरम पर है, जिससे रोजगार और निवेश के नए रास्ते खुले हैं।

हालांकि, चुनौतियां अब भी बाकी हैं। लश्कर-ए-तैयबा और उसका छद्म संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ अभी भी खतरा बने हुए हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के लॉन्च पैड पर बैठे आतंकी घुसपैठ की फिराक में रहते हैं।

5 अगस्त का महत्व सिर्फ कश्मीर की वादियों तक सीमित नहीं है। ठीक एक साल बाद, यानी 5 अगस्त 2020 को अयोध्या की धरती पर एक और इतिहास रचा गया।

सदियों की प्रतीक्षा, पीढ़ियों के संघर्ष और देश की सबसे लंबी कानूनी लड़ाइयों में से एक के बाद, 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर का ऐतिहासिक भूमि पूजन किया। आज इस भावुक और गौरवशाली क्षण को पूरे 6 साल हो चुके हैं।

वह दिन हर उस भारतीय के लिए बेहद खास था, जिसने अपनी आंखों में अयोध्या में राम मंदिर का सपना संजोया था। वह अनुष्ठान सिर्फ कुछ ईंटों को रखने का कार्यक्रम नहीं था, वह भारत की सांस्कृतिक आत्मा का पुनर्जागरण था। 5 अगस्त 2020 के उस भूमि पूजन ने जिस निर्माण कार्य का शुभारंभ किया, उसी का भव्य परिणाम पूरी दुनिया ने 22 जनवरी 2024 को देखा, जब पूरे विधि-विधान के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई और मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

मौजूदा समय में अयोध्या का श्री राम मंदिर पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह भगवान श्री राम की जन्मभूमि पर बना एक भव्य केंद्र है, जो भारत की आस्था, सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक पर्यटन का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है, जहां देश-विदेश से करोड़ों लोग दर्शन के लिए आते हैं। अयोध्या को हिंदू धर्म की सात पवित्र मोक्षदायिनी नगरियों (सप्तपुरी) में प्रथम स्थान प्राप्त है। करोड़ों पर्यटकों के आने से यहां के स्थानीय व्यापार, होटल और परिवहन उद्योग को भारी बढ़ावा मिला है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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