कर्नाटक: यादगीर तालुक के रासायनिक रिसाव के कारण तीन श्रमिकों की मौत, 2 घायल

यादगीर, 5 अगस्त (आईएएनएस)। यादगीर तालुक के कादेचुर औद्योगिक क्षेत्र में एक दवा निर्माण इकाई में कथित तौर पर रसायन रिसाव के कारण तीन श्रमिकों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

मृतकों की पहचान विक्रम सिंह (30), संजय सिंह (29) और गणेश (25) के रूप में हुई है। घायल शिवकुमार और हेमंत को रायचूर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

यह घटना मंगलवार देर रात कादेचुर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक दवा निर्माण कंपनी में हुई।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, कारखाने के अंदर रासायनिक रिसाव के कारण श्रमिकों को नुकसान पहुंचा। पुलिस को आशंका है कि यह रसायन सांस के जरिए पीड़ितों के शरीर में पहुंचा और घातक साबित हुआ। रिसाव का सटीक कारण और रसायन की प्रकृति का अभी पता लगाया जाना बाकी है।

घटना की सूचना मिलते ही सैदापुरा पुलिस स्टेशन के कर्मी मौके पर पहुंचे और उन्होंने जांच शुरू कर दी है।

शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इस त्रासदी के पीछे कोई लापरवाही या औद्योगिक सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन था।

आगे की जांच जारी है। अधिक जानकारी की प्रतीक्षा है।

इसी साल, 15 फरवरी को भी ऐसी ही एक घटना सामने आई थी। मांड्या जिले के कारेकाट्टे गांव के पास स्थित कीर्ति केमिकल्स इंडस्ट्रीज में गैस कटर का उपयोग करके कारखाने की मशीनरी को अलग करते और स्थानांतरित करते समय एक टैंक में विस्फोट और रिसाव हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बिहार के दो प्रवासी श्रमिकों की मृत्यु हो गई और चार गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में हुई जांच में पता चला कि कारखाने की मशीनरी को स्थानांतरित करते समय उसे अलग करने के कारण रिसाव हुआ था।

पुलिस ने बताया कि यह कारखाना लंबे समय से पुलिस की निगरानी में था। 2022 में जब जहरीली गैस के रिसाव से पास के गांव में फसलों को नुकसान पहुंचा और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा, तो लोगों ने सुरक्षा संबंधी चिंता जताई।

इस घटना के बाद स्थानीय किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद, मालिकों ने कारखाना बंद करने का फैसला किया। तब से, परिचालन ठप्प पड़ा था। अधिकारियों द्वारा सामग्री को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का निर्णय लेने के बाद 15 फरवरी को यह प्रक्रिया चल रही थी और रासायनिक टैंक को खाली किया जा रहा था, तभी विस्फोट हुआ, जिसके परिणामस्वरूप जानमाल का नुकसान हुआ और लोग घायल हुए।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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