नई दिल्ली, 5 अगस्त (आईएएनएस)। लोकसभा की कार्यवाही बुधवार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई क्योंकि विपक्ष दलों की ओर से लगातार नारेबाजी की जा रही थी। इस वजह से लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।
लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने सदन में मौजूद सभी सांसदों से संसद के नियमों का पालन करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने सांसदों से कहा कि वो सदन में किसी भी प्रकार का पोस्टर नहीं लहराएं।
हालांकि, स्पीकर की अपील के बावजूद भी जब सांसदों की ओर से हंगामा नहीं थमा, तो सदन की कार्यवाही को बुधवार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्षी दलों की ओर से विभिन्न मुद्दों का जिक्र करके मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इन मुद्दों में मुख्य रूप से नीट पेपर लीक, 20 जुलाई पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला शामिल है।
इससे पहले मंगलवार को विपक्षी दलों के हंगामे की वजह से कई बार सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी। सदन में मौजूद सांसद लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस वजह से सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया था।
विनियोग (संख्या 3) विधेयक, 2026, जिसका उद्देश्य 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान हुए अतिरिक्त व्यय के लिए भारत की संचित निधि से व्यय को अधिकृत करना है। विपक्ष के विरोध के बीच विधेयक लोकसभा में ध्वनि मत से पारित हो गया।
वहीं, विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक चर्चा के लिए पेश किया। इस विधेयक में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन करने का प्रस्ताव है।
वहीं, लोकसभा को मंगलवार को विपक्षी दलों के लगातार विरोध प्रदर्शन और गतिरोध की वजह से स्थगित कर दिया गया था। इससे एक दिन पहले सोमवार को लोकसभा ने विपक्षी सदस्यों के लगातार विरोध के बीच बिना किसी चर्चा के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने वाले विधेयक को पारित कर दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 इस वर्ष की शुरुआत में जारी किए गए अध्यादेश को प्रतिस्थापित करने का प्रयास करता है, जिसका उद्देश्य लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और न्यायपालिका के समक्ष बढ़ते कार्यभार को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को बढ़ाना है।
प्रस्तावित कानून के तहत भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर, सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी जाएगी, जिससे न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी। यह विधेयक मई में जारी किए गए सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026 को प्रतिस्थापित करने का प्रयास करता है।





