गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश पर्व पर भाजपा नेताओं ने दी शुभकामनाएं, कहा- उनका जीवन आज भी प्रेरणास्रोत

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। सिखों के आठवें गुरु, श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व पर देशभर के नेताओं ने श्रद्धा के साथ शुभकामनाएं दीं। केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने गुरु साहिब की करुणा, सेवा और विनम्रता को याद करते हुए देशवासियों से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “सिखों के आठवें गुरु, करुणा, सेवा और विनम्रता की प्रतिमूर्ति, ‘बाला प्रीतम’ के नाम से विख्यात श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश पर्व पर समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। गुरु साहिब का आशीर्वाद सदैव मानव कल्याण और सेवा के मार्ग पर अग्रसर रखें।”

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी गुरु पर्व की बधाई दी। उन्होंने कहा, “श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।”

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरु साहिब को प्रेम, दया और करुणा का पर्याय बताया। उन्होंने कहा, “प्रेम, दया और करुणा के पर्याय, सिखों के आठवें गुरु, श्रद्धेय श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन करता हूं! आपकी शिक्षाएं व उपदेश सर्वदा हम सबको धर्म पथ पर चलने तथा मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरु हरकिशन साहिब जी के त्याग और समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा, “धर्म और मानवता के प्रति समर्पित, सिखों के आठवें गुरु श्री गुरु हरकिशन सिंह जी के प्रकाश पर्व पर आप सभी को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं! मानवता, सेवा, करुणा और त्याग का उनका दिव्य संदेश हम सभी को सदैव लोककल्याण, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देता रहेगा।”

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरु साहिब के बाल्यकाल में दिए गए उदाहरण को प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा, “आठवें सिख गुरु, श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के पावन प्रकाश पर्व की समस्त देशवासियों को लख-लख बधाइयां। बाल्यावस्था में ही उन्होंने मानवता, सेवा और विनम्रता का जो अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया, वह आज भी सम्पूर्ण विश्व के लिए प्रेरणास्रोत है। पीड़ितों और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा का उनका संदेश हमें प्रेम, सहानुभूति और समानता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। आइए, इस पावन अवसर पर हम सभी उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर मानव कल्याण के प्रति समर्पित रहने का संकल्प लें।”

उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी गुरु साहिब को नमन किया। उन्होंने कहा, “करुणा और मानवता के प्रतीक एवं सिखों के आठवें गुरु श्री हरकिशन सिंह साहिब जी के प्रकाश पर्व पर उन्हें सादर नमन! उनकी शिक्षाएं हमें निस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।”

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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