‘जन-गण-मन’ के रचयिता रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के रचयिता, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने एक्स पर लिखा, “भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के महान शिल्पी, विश्वकवि, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के रचयिता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”

ओम बिड़ला ने आगे लिखा, “गुरुदेव टैगोर एक महान कवि होने के साथ ही दार्शनिक, शिक्षाविद्, संगीतकार, चित्रकार, समाज सुधारक और मानवतावादी चिंतक भी थे। अपनी साहित्यिक रचनाओं, शिक्षा दर्शन और सांस्कृतिक दृष्टि के माध्यम से उन्होंने भारतीय चेतना को नई दिशा प्रदान की। वर्ष 1913 में ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्राप्त कर गुरुदेव ने भारतीय साहित्य को वैश्विक पहचान दिलाई। उनका मानना था कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के सर्वांगीण विकास और स्वतंत्र चिंतन का आधार है।”

उन्होंने कहा, “भारतीय संस्कृति, प्रकृति, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों को अपनी रचनाओं में अद्भुत संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त करने वाले गुरुदेव टैगोर ने प्रेम, करुणा, सह-अस्तित्व और विश्व-बंधुत्व का संदेश दिया। उनका सम्पूर्ण जीवन और विचार आज भी भारतीय संस्कृति, शिक्षा और मानवता के लिए प्रेरणा के शाश्वत स्रोत हैं, उनकी रचनाएं आज भी समाज को संवेदनशील, जागरूक और मानवीय बनाने की प्रेरणा देती हैं।”

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “कविगुरु गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। गुरुदेव टैगोर ने अपनी लेखनी से भारत की आत्मा को स्वर दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में नई चेतना का संचार किया। उनकी अमर कृति ‘जन गण मन’ राष्ट्र की एकात्म चेतना और आत्मगौरव का प्रतीक है। विश्व भारती विश्वविद्यालय की स्थापना कर कविगुरु ने भारतीय संस्कृति, दर्शन और शिक्षा के वैभव को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया। उनका साहित्य आज भी करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है।”

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया,”राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के रचयिता, नोबेल पुरस्कार से अलंकृत, महान कवि व अद्वितीय कथाकार गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं!आपकी अमर कृतियां, आदर्श जीवन व पुण्य विचार सदैव हमें राष्ट्र की उन्नति और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित करते रहेंगे।”

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने एक्स पर लिखा, “भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अग्रदूत, महान दार्शनिक व साहित्यकार, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित, श्रद्धेय गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। उन्होंने न केवल देश के लिए ‘जन-गण-मन’ जैसा पवित्र राष्ट्रगान रचा, अपितु शिक्षा, कला और स्वराज के विचार को भी नई दिशा दी। आपकी कालजई और राष्ट्रप्रेम की अलख जगाने वाली रचनाएं व पुण्य विचार हमें आज भी आत्मबोध, राष्ट्रबोध और मानवीय मूल्यों की ओर प्रेरित करते हैं।”

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “हमारे राष्ट्रीय गान ‘जन-गण-मन’ की सच्ची भावना को साकार करने वाले, भारतीय विद्वान, नोबेल पुरस्कार विजेता और गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी पुण्यतिथि पर सादर नमन।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पोस्ट में कहा, “भारत के मस्तक पर साहित्य, संस्कृति और स्वाभिमान का स्वर्णिम मुकुट सजाने वाले, राष्ट्रगान के अमर रचयिता, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि।आपकी अमर रचनाएं भारतीय साहित्य की गौरवशाली विरासत हैं, जो प्रत्येक पीढ़ी को संवेदना और सृजन का संदेश देती रहेंगी।”

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा, “विश्वविख्यात कवि, महान साहित्यकार, जन-गण-मन के रचयिता, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन! भारतीय संस्कृति, साहित्य, शिक्षा, उनके विचार और कालजयी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा प्रदान करती रहेंगी।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक्स पोस्ट में कहा, “सशक्त लेखनी के माध्यम से भारतीय साहित्य को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने वाले महान कवि, चिंतक एवं नोबेल पुरस्कार से अलंकृत गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र और समाज सेवा को समर्पित आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।”

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक्स पर पोस्ट किया, “विश्वविख्यात कवि, महान साहित्यकार, दार्शनिक, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के रचयिता एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। भारतीय साहित्य, संगीत, कला और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनकी कालजयी रचनाएं मानवता, राष्ट्रप्रेम और आध्यात्मिक चेतना का संदेश देकर आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेंगी।”

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स में कहा, “राष्ट्रगान के रचयिता, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, महान शिक्षाविद् एवं नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। अपने साहित्य, शिक्षा-दर्शन और मानवीय मूल्यों के माध्यम से उन्होंने भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी। ज्ञान, सृजन, संवेदना और राष्ट्रप्रेम का उनका संदेश आज भी विकसित, समरस और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की हमारी यात्रा को निरंतर आलोकित करता है।”

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान कवि, विश्वविख्यात साहित्यकार एवं राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन। उनकी लेखनी ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा दी और मानवता, शिक्षा तथा राष्ट्रप्रेम के उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हैं।”

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट किया,”राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के रचयिता, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित राष्ट्रऋषि, महान कवि एवं साहित्यकार गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रचेतना और मानवता को समर्पित उनका जीवन एवं कालजयी साहित्य सदैव समाज को कर्तव्य, सेवा और सांस्कृतिक गौरव के पथ पर अग्रसर करता रहेगा।”

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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