चमोली की वादियो में बसा ऐसा मंदिर, जहां भोलेनाथ ने धारण किया था गोपी का रूप

चमोली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय की शांत वादियों में बसा चमोली जिला अपनी अद्वितीय धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जाना जाता है। इसी जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में स्थित ‘श्री गोपीनाथ मंदिर’ भगवान शिव को समर्पित एक अति प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है।

गोपेश्वर के हृदयस्थल में स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कत्यूरी राजवंश की भव्य वास्तुकला और नागर शैली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, 24 द्वारों वाले गर्भगृह और प्रांगण में खड़े अष्टधातु के प्राचीन त्रिशूल के लिए देश-विदेश में जाना जाता है।

शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया के जरिए मंदिर की भव्यता का बखान किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का वीडियो पोस्ट किया, जिसके साथ उन्होंने मंदिर की विशेषता बताते हुए लिखा, “चमोली जिले के गोपेश्वर में स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर, भगवान शिव की अटूट भक्ति का एक बेमिसाल केंद्र है। प्रकृति की गोद में बसे इस पवित्र धाम में महादेव के दर्शन मन को असीम शांति और गहरे आध्यात्मिक अनुभव से भर देते हैं। सावन के पवित्र महीने में, चमोली पहुंचने पर, देवाधिदेव महादेव के दर्शन के लिए श्री गोपीनाथ मंदिर ज़रूर जाएं और उनका आशीर्वाद लें।”

उत्तराखंड के चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में स्थित प्राचीन श्री गोपीनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक धाम है। हालांकि इसका नाम ‘गोपीनाथ’ (जो आमतौर पर भगवान कृष्ण से जुड़ा है) है, यहां भगवान शिव की पूजा गोपी रूप में होती है और इसे चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ का शीतकालीन गद्दी स्थल भी माना जाता है। मंदिर के आंगन में अष्टधातु का एक विशाल त्रिशूल गड़ा है, जो हजारों साल पुराना बताया जाता है।

मंदिर को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित है, जिसमें बताया गया है कि भगवान शिव ने यहां गोपी रूप धारण किया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम गोपेश्वर और मंदिर का नाम गोपीनाथ पड़ा। दरअसल, भगवान कृष्ण जब वृंदावन में महारास रचा रहे थे और बांसुरी बजा रहे थे, तब भगवान शिव उस मोहक धुन को सुनकर वहां पहुंचे। शिवजी ने भी रास में सम्मिलित होने की इच्छा जताई, जिस पर उन्हें गोपियों का रूप धारण करना पड़ा। तभी से इस स्थान पर भगवान शिव के गोपी रूप की मान्यता जुड़ी और इसका नाम गोपीनाथ पड़ा।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव यहां तपस्या में लीन थे और कामदेव ने उनकी तपस्या भंग करने का प्रयास किया, तब शिवजी ने अपना त्रिशूल उन पर फेंका था। वह त्रिशूल यहीं स्थापित हो गया।

कत्युरी राजवंश (8वीं से 11वीं शताब्दी के बीच) द्वारा निर्मित यह मंदिर अपनी अनूठी शैली के लिए जाना जाता है। इसका गर्भगृह लगभग 30 वर्ग फुट का है और यहां तक पहुंचने के लिए 24 द्वार बने हुए हैं। सर्दियों के मौसम में जब रुद्रनाथ के कपाट भारी बर्फबारी के कारण बंद हो जाते हैं, तब भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली और प्रतीकात्मक विग्रह को इसी गोपीनाथ मंदिर में लाया जाता है, जहां जाड़े के महीने में उनकी विधिवत पूजा होती है।

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झारखंड में छात्रों का 16वें दिन विरोध-प्रदर्शन जारी, सरकार पर ‘खोखले वादे’ करने का लगाया आरोप रांची, 9 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों का विरोध प्रदर्शन रविवार को 16वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी छात्रों की मुख्य मांगों पर किसी नतीजे या समझौते तक पहुंचने में नाकाम रहा। 2 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की ओर से आयोजित 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद से ही छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के समर्थन में कई छात्र नेता भूख हड़ताल पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार पर “खोखले वादे” करने का आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि सरकार उनके प्रतिनिधियों के साथ बार-बार बातचीत तो करती है, लेकिन छात्रों की मांगों को न तो मानती है और न ही उन पर कोई कार्रवाई करती है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो 2 अगस्त से भूख हड़ताल पर हैं और शनिवार देर रात से उनकी तबीयत बिगड़ रही है। तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों की एक टीम विरोध स्थल पर पहुंची और महतो को सलाइन चढ़ाया। डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड शुगर लेवल काफी गिर गया था और एहतियात के तौर पर उन्हें सलाइन दिया गया। अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद, महतो ने कहा है कि वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे और न ही अपनी मांगों से समझौता करेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि उनकी भूख हड़ताल और छात्रों का व्यापक विरोध-प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक कि उम्मीदवारों द्वारा उठाए गए मुद्दों का कोई ठोस समाधान नहीं निकल जाता। आईएएनएस से बात करते हुए महतो ने कहा, “रात करीब 2:30 बजे उन्होंने खून का सैंपल लिया और टेस्ट किया। ब्लड शुगर का लेवल बहुत कम था। उसके बाद, उन्होंने सलाइन देना शुरू किया और तब से हालत में थोड़ा सुधार हुआ है।” डॉक्टर ए.के. सिन्हा कहते हैं, “जो कोई भी लंबे समय तक भूखा रहता है, उसके पेट में ज़्यादा एसिड बनने लगता है। क्योंकि वह कुछ खा नहीं रहा है, इसलिए पेट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता। इसी वजह से उसे सीने में दर्द हो रहा है। हालाँकि, उसका दिल और फेफड़े सामान्य हैं।” इस बीच छात्र नेता चंदन ने सरकार और प्रशासन पर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पुलिस अधिकारी और प्रशासन रात में छात्रों को प्रदर्शन स्थल से हटाने की कोशिश कर रहे थे। छात्र अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे और न्याय की मांग करेंगे। महतो की तबीयत ठीक नहीं है, कल रात उनका ब्लड शुगर लेवल गिर गया था। फिर भी, उन्होंने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है।” भूख हड़ताल में शामिल छात्र नेता प्रेम नायक ने कहा, “भूख हड़ताल पर यह मेरा छठा दिन है। देवेंद्र बाबू की सेहत भी थोड़ी बिगड़ रही है। आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर सिर्फ खोखले वादे किए जा रहे हैं। मैं सरकार को बस यह साफ कर देना चाहता हूं कि बातचीत के लिए बुलाकर और हमारी मांगें न मानकर हमारा समय बर्बाद न किया जाए।” छात्र नेता महेंद्र प्रसाद मंडल ने कहा, “मैं भी एक छात्र रहा हूं। अपनी छात्र जिंदगी बिताने के बाद जब झारखंड में भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हमें नौकरी नहीं मिल पाई, तो हमने आने वाली पीढ़ियों के लिए भूख हड़ताल करने का फैसला किया। सरकार बार-बार प्रतिनिधिमंडल को बुला तो रही है, लेकिन हमारी मांगों पर खुलकर विचार नहीं कर रही है। कल 10 अगस्त है, और विधानसभा तक विरोध मार्च भी निकाला जाएगा।” छात्रों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग उन परीक्षाओं को रद्द करना है, जिनमें गड़बड़ी का आरोप है। साथ ही, वे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और भविष्य की परीक्षाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग कर रहे हैं। इससे पहले, शुक्रवार को बातचीत के पहले दौर में सरकार के पांच सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल और छात्रों के 10 सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया था। छात्रों ने सरकार के सामने अपनी सभी मांगें रखीं और चल रहे आंदोलन के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, शनिवार को झारखंड सरकार और विरोध कर रहे छात्रों के बीच बातचीत का दूसरा दौर भी बिना किसी नतीजे के खत्म हो गया। इस बातचीत से दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हो सके और न ही विरोध कर रहे छात्र अपना आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार हुए। –आईएएनएस ओपी/एएस

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