नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की कंबाइंड सिविल सर्विसेज प्रारंभिक परीक्षा-2025 को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों की गहन पड़ताल की मांग की गई है।
परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल
JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को लेकर अभ्यर्थियों के बीच पहले से ही कई तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब इन्हीं कथित अनियमितताओं को आधार बनाकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता की ओर से कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। इसके साथ ही परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग भी उठाई गई है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल ये सभी आरोप कथित अनियमितताओं के तौर पर सामने आए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच या न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष से ही होगी।
CBI जांच की मांग क्यों महत्वपूर्ण?
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता का सीधा संबंध लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से होता है। JPSC जैसी राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षा में बड़ी संख्या में उम्मीदवार लंबे समय तक तैयारी करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी का आरोप सामने आने पर अभ्यर्थियों के बीच असंतोष और अविश्वास बढ़ना स्वाभाविक है।
जनहित याचिका में इसी संदर्भ में ऐसी जांच एजेंसी से पड़ताल कराने की मांग की गई है, जो कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से जांच कर सके। रिपोर्टों के अनुसार, याचिका में CBI या स्वतंत्र जांच समिति के माध्यम से जांच कराने की मांग का उल्लेख है।
परीक्षा रद्द करने की भी मांग
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल PIL में केवल जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि परीक्षा को रद्द करने और आवश्यक होने पर दोबारा परीक्षा कराने की मांग भी रखी गई है। इससे JPSC परीक्षा-2025 का विवाद और गंभीर हो गया है।
हालांकि, परीक्षा रद्द होगी या नहीं, दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी या जांच किस एजेंसी से होगी—इस पर अंतिम निर्णय अदालत के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगे की कार्यवाही पर है।
अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता
JPSC परीक्षा से जुड़े विवाद का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ता है जिन्होंने महीनों और वर्षों तक मेहनत करके परीक्षा की तैयारी की है। उम्मीदवार चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो और योग्य अभ्यर्थियों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।
यदि जांच में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो इससे परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, यदि आरोप जांच में साबित नहीं होते हैं तो परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बनी आशंकाओं को भी दूर करने की जरूरत होगी।
फिलहाल JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है और CBI जांच, परीक्षा रद्द करने तथा दोबारा परीक्षा कराने जैसी मांगों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।





