श्रीनगर, 12 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए ) ने बुधवार को 1990 के दोहरे हत्याकांड के मामले में नौ जगहों पर छापेमारी की। अधिकारियों ने कहा, “ये तलाशी अनंतनाग जिले के डूरू पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में की गई, जिसकी जांच अब एसआईए कर रही है।”
कश्मीरी पंडित कवि-विद्वान सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल को उनके घर से खींचकर ले जाने और उनकी हत्या किए जाने के साढ़े तीन दशक बाद स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एसआईए) कश्मीर ने बुधवार को एक समन्वित कार्रवाई शुरू की। एजेंसी ने घाटी में नौ जगहों पर एक साथ तलाशी ली ताकि उनके हत्यारों और साथियों का पता लगाया जा सके जो अब भी फरार हैं।
अनंतनाग के कोकरनाग इलाके के सोआफ शाली गांव में रहने वाले कौल और उनके बेटे को 1990 में उनके घर से अगवा करने के बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाद में उनके शव एक पेड़ से लटके हुए मिले थे। इस हत्या ने पूरी घाटी में सनसनी फैला दी थी और यह उस आतंकी मुहिम का सबसे डरावना उदाहरण बन गया, जिसके चलते कश्मीर से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को पलायन करना पड़ा।
प्रेमी जम्मू-कश्मीर के सबसे सम्मानित साहित्यकारों में से एक थे। वे एक विद्वान कवि थे, जिन्होंने दशकों तक राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और कश्मीर के समुदायों के बीच भाईचारे के लिए लिखा और अभियान चलाया। वे एक स्वतंत्रता सेनानी भी थे और भारत की आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल थे। उनकी हत्या को एकता की आवाज उठाने वाले एक व्यक्ति पर हमले के तौर पर देखा गया, जिससे यह घटना और भी गंभीर हो गई। बुधवार को हुई छापेमारी इसी से जुड़े एक मामले में मिली अहम कामयाबी के ठीक बाद हुई है।
जून में एसआईए ने 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें जेल में बंद जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक को एसकेआईएमएस की नर्स सरला भट्ट के 1990 में हुए अपहरण, प्रताड़ना और हत्या का मास्टरमाइंड बताया गया। यह मामला 34 साल तक ठंडे बस्ते में रहने के बाद दोबारा खोला गया था।
जब घाटी में हालात बिगड़ रहे थे, तब ड्यूटी पर आने वाली कश्मीरी पंडित महिलाओं में से एक सरला भट्ट को 18 अप्रैल 1990 को उस अस्पताल के पास से अगवा कर लिया गया, जहां वह काम करती थीं। उन्हें प्रताड़ित किया गया और उमर कॉलोनी मालबाग में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।
बुधवार को राजौरी जिले में 6, जम्मू में 2 और घाटी में एक जगह पर छापेमारी की गई। यह छापेमारी अनंतनाग के डूरू पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में की गई थी। अब एसआईए ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है क्योंकि वह कश्मीरी पंडित समुदाय को निशाना बनाकर उग्रवाद के दौर में हुई अनसुलझी हत्याओं के संबंध में अपने जांच का दायरा बढ़ा रही है।
ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान में उन संपत्तियों और लोगों को निशाना बनाया गया, जिनके बारे में माना जाता है कि वे 1990 में हुए अपहरण की साजिश से जुड़े थे। हालांकि, छापेमारी के दौरान किन जगहों पर तलाशी ली गई या क्या बरामद हुआ, इसकी जानकारी अभी आधिकारिक तौर पर नहीं दी गई है।





